राजधानी शिमला के बहुचर्चित युग अपहरण एवं हत्याकांड के तीनों दोषियों चंद्र शर्मा, विक्रांत और तेजेंद्र को भले ही सत्र न्यायालय से फांसी की सजा हो गई हो लेकिन देवभूमि में आज तक किसी भी दोषी को फांसी पर नहीं लटकाया गया है।
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ऐसा इसलिए है क्योंकि सूबे की किसी भी जेल में फांसीघर नहीं है। युग मामले में सजा बरकरार रहने पर हिमाचल पड़ोसी राज्य पंजाब से मदद ले सकता है। पंजाब की पटियाला जेल में फांसीघर बना हुआ है। देवभूमि में भले ही द्वेष भाव में कोई अपराध हो जाए लेकिन सोची समझी साजिश के तहत एक बच्चे की हत्या करने जैसा जघन्य अपराध कभी नहीं हुआ।
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यही कारण है कि चार साल के मासूम युग के अपहरण के बाद हत्या के तथ्य जैसे जैसे सामने आए, उसके बाद से लोग लगातार फांसी की मांग कर रहे थे। अब सत्र न्यायालय ने भी इस केस को रेयरेस्ट आफ रेयर मानते हुए तीनों को फांसी की सजा सुना दी है।
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हिमाचल में आखिरी बार साल 2004 में आंध्र प्रदेश के श्यामल राव रेड्डी को फांसी की सजा हुई थी। हालांकि, वह नाहन जेल से फरार हो गया था। इससे पहले एक और को फांसी की सजा तो हुई लेकिन हाईकोर्ट ने सजा माफ कर दी थी।
इसके अलावा किसी अपराध में किसी को फांसी की सजा हुई है या नहीं, यह न तो पुलिस मुख्यालय के किसी अधिकारी को पता है और न ही जेल मुख्यालय के अधिकारियों के पास ऐसी कोई जानकारी है।