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रहने लायक नहीं राजधानी शिमला, मंत्रालय से जारी रिपोर्ट में खुलासा

Sun, 19 Aug 2018 04:15 PM IST
अरविंद ठाकुर, अमर उजाला, शिमला
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पहाड़ों की रानी और देश-विदेश के सैलानियों को आकर्षित करने वाली राजधानी शिमला रहने लायक ही नहीं है।
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केंद्रीय शहरी और आवास मंत्रालय की ओर से जारी ‘ईज ऑफ  लिविंग’ सूची में शिमला देश के 111 शहरों में से 92वें स्थान पर है। शिमला को 100 में से मात्र 27.32 अंक मिले हैं। इसमें राजधानी शिमला के 35.34 वर्ग किमी क्षेत्र को शामिल किया गया है। इस सूची में देश भर में पुणे पहले स्थान पर है। वहीं, स्मार्ट सिटी धर्मशाला की स्थिति राजधानी शिमला से ज्यादा बेहतर है। धर्मशाला 34.57 अंकों के साथ 56वें स्थान पर है। मंत्रालय ने जून 2017 में ‘ईज ऑफ  लिविंग’ के लिए फ्रे मवर्क तैयार किया था। केंद्रीय शहरी और आवास मंत्रालय ने पहली बार यह आंकड़े जारी किए हैं।
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शिमला को किस क्षेत्र में कितने अंक मिले
कैटेगरी    अंक         अधिकतम अंक
गवर्नेंस     6.04            25
संस्कृति    0.41           6.25
शिक्षा      3.35            6.25
स्वास्थ्य    2.94            6.25
सुरक्षा      2.61            6.25
रोजगार    1.55            5.00
आवास    0.11             5.00
स्पेस         0                5.00
भू उपयोग 0                5.00
बिजली    1.88            5.00
ट्रांसपोर्टेशन 0.3           5.00
पानी सप्लाई 1.44         5.00
अपशिष्ट जल प्रबंधन    0.78     5.00
ठोस अपशिष्ट प्रबंधन    2.34      5.00
प्रदूषण कम करने को प्रयास    3.56    5.00

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धर्मशाला को किस क्षेत्र में कितने अंक मिले
कैटेगिरी        अंक    अधिकतम अंक

गवर्नेंस        8.76    25
संस्कृति        0.01    6.25    
शिक्षा        4.1    6.25
स्वास्थ्य        3.82    6.25
सुरक्षा        2.27    6.25
अर्थव्यवस्था और रोजगार    1.83    5.00
आवास और समावेश    0.9    5.00
पब्लिक ओपन स्पेस    2.49    5.00
मिश्रित भूमि उपयोग     0.04    5.00
पावर सप्लाई        1.32    5.00
ट्रांसपोर्टेशन        0.67    5.00
पेयजल सप्लाई        2.39    5.00
अपशिष्ट जल प्रबंधन    1.51    5.00
ठोस अपशिष्ट प्रबंधन    0.67    5.00
प्रदूषण कम करने को प्रयास    3.79    5.00
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आकलन के पैमाने- संस्थानों के पैमाने में शासन प्रणाली, सामाजिक पैमाने में संस्कृति, शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा, आर्थिक पैमाने में अर्थव्यवस्था और रोजगार व भौतिक सेवाओं के तौर पर चार मुख्य बिंदूू रहे। इन्हें आगे 15 वर्गों के 78 पैरामीटर में बांटा गया। इसमें नागरिक सुविधाओं, छात्र-शिक्षक, डॉक्टर-मरीज अनुपात, पेयजल सप्लाई, प्रदूषण स्तर, हरित क्षेत्र, सार्वजनिक परिवहन, अपराध दर जैसी बहुत से मानक रखे गए हैं।
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इस तरह शहरों को दिए अंक- शहरों के लिए 100 अंक तय किए गए थे। इसमें संस्थानों और सामाजिक स्तंभों के लिए 25-25 अंक थे। वहीं 5 अंक आर्थिक सेवाओं के थे। बाकी 45 अंक भौतिक सेवाओं को दिए गए।
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