बिना कोचिंग भी सफलता हासिल की जा सकती है। इसका उदाहरण पेश किया है कि हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले की शिखा ने। इन्होंने बिना किसी कोचिंग के लिए एचएएस परीक्षा में प्रदेश भर में चौथा स्थान हासिल किया। खुशी इतनी थी कि शिखा की आंखें छलक पड़ीं। घर पहुंचते ही परिजनों और ग्रामीणों ने शिखा को पलकों पर बैठा लिया।
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- फोटो : अमर उजाला
पिता ने हार पहनाकर बेटी को गले से गलाया तो दोनों की आंखें भर आईं। शिखा जब मंगनूह गांव अपने घर पहुंची को मां आरती की थाली लेकर तैयार थी। घर पर ग्रामीण बधाई देने के लिए पहुंच गए थे। पिता से गले लगने के बाद मां ने शिखा की आरती उतारी और लाडली को गले से लगा लिया।
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इसके बाद लोगों ने भी शिखा को हार पहनाया और कामयाबी पर बधाई दी। बेटी की इस उपलब्धि के बाद पिता लिन्जो राम को अपनी बेटी पर गौरव महसूस कर रहे हैं। माता गुड्डी देवी की खुशी का भी ठिकाना नहीं है। शिखा के पिता सेना से सेवानिवृत्त हैं।
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शिखा सात बेटियों में सबसे छोटी है। इससे पहले भी वह तीन बार एचएएस, दो बार अलाइड और आरटीओ इंस्पेक्टर की परीक्षा दे चुकी हैं, लेकिन कामयाबी हासिल नहीं हुई।
अब शिखा को मंजिल मिल गई है। अमर उजाला से बात करते हुए शिखा ने कामयाबी का श्रेय अपने माता-पिता को दिया है। बकौल शिखा उनके पति सबसे बड़े प्रेरणा स्रोत हैं। शिखा ने कहा कि कठिन परिस्थिति में भी उन्होंने मेरी हौसला अफजाई।