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हिमाचल में निर्मित 13 दवाओं के सैंपल फेल, यहां देखें पूरी सूची

Tue, 12 Mar 2019 04:54 PM IST
Krishan Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नालागढ़ (सोलन)
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sample test fail
फार्मा हब के रूप में उभरे और 35 फीसदी दवाओं का एशिया में निर्यात करने वाले हिमाचल प्रदेश के उद्योगों की निर्मित दवाएं मानकों पर खरा नहीं उतर रही हैं। 
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medicine
हर बार केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) की ओर से जारी किए जाने वाले ड्रग अलर्ट में हिमाचल की दवाएं मानकों पर खरा नहीं उतर रही हैं। बीते वर्ष हिमाचल की 100 से अधिक दवाओं के सैंपल फेल हो चुके हैं। 
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डेमो
इस वर्ष दो माह में 27 दवाएं गुणवत्ता में खरी नहीं उतरी हैं। फरवरी माह में 37 फेल हुए सैंपलों में हिमाचल के उद्योगों की 13 दवाएं हैं। इनमें औद्योगिक हब बीबीएन की 9, सिरमौर की 3 और कांगड़ा की 1 दवा शामिल है। जनवरी माह में देश भर में 45 दवाओं के सैंपल फेल हुए हैं। इनमें हिमाचल की 14 दवा शामिल थी।

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फेल हुए सैंपलों में ओरिसन फार्मा काला अंब की सेफपोडोक्साईम, सैलस फार्मा हररायपुर बद्दी की सेफेजिम एंड लैक्टिक एसिड बैसिलस, थियोन फार्मा सैणीमाजरा नालागढ़ का सेफटरीजोन एंड टैजोबेक्टम इंजेशन, ग्रेक्यूर फार्मा बेलीदयोड़ नालागढ़ की इसोपेन-20, इंडस्विफट लिमिटेड मलकूमाजरा नालागढ़ का एजिटेक इंजेक्शन शामिल है।
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इसके साथ ही जैकसन  लैबोरेटरी संसारपुर टैरेस कांगड़ा का कैटोरोलेक ट्रॉमेथाईन इंजेक्शन, फ्रेसेनियस काबी ऑनकोलॉजी इंडस्ट्रियल एरिया बद्दी का लियोकोवोरिन कैल्शियम इंजेक्शन, इनरिको फार्मास्यूटिकल झाड़माजरी बद्दी की लैटरोजोल, सिंबोसिस फार्मास्यूटिकल काला अंब की डॉक्सीसाइकलिन एंड लैक्टिक एसिड बैसिलस के सैंपल भी फेल हुए।
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पोलस्टार पावर इंडस्ट्री धुमवाला बद्दी की सेफेजिम एंड लैक्टिक बैसिलस डिसप्रेसिबल, हेल्थ बायोटेक बद्दी का नाईट्रोगलिसरीन इंजेक्शन, अलगेन हैल्थकेयर कालाअंब की ऐसीलोफेनेक, पैरासिटामोल व सेरोटीओपेपडाईज, मैगब्रो हैल्थकेयर मैहसा टिब्बा नालागढ़ की रामीप्रिल दवा शामिल है। यह दवाएं गैस्ट्रिक, दर्द निवारक, कोलस्ट्रोल, अनीमिया, हाई बीपी के उपचार में ली जाती हैं। 
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राज्य दवा नियंत्रक नवनीत मरवाह ने बताया कि सैंपल फेल हुए उद्योगों को नोटिस देकर बैच मार्केट से वापस मंगा दिए है। इनकी विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है। उन्होंने बताया कि ने कहा कि कई दवाओं में वातावरण का भी असर पड़ता है, जिसके चलते कई दवाओं के सैंपल फेल होते हैं। उन्होंने कहा कि 90:10 के अनुुपात में बददी में ही ड्रग टेस्टिंग लैब बन रही है, जिससे दवाओं की जांच यहीं लैब में हो सकेगी।
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