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शिमला के आसमान में हो रहा बड़ा शोध, सफल रहा तो आएगी क्रांति

Thu, 08 Dec 2016 09:15 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, शिमला
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शिमला से 400 किलोमीटर ऊपर अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन में हो रहे शोध का खुलासा हो गया है। यदि ये शोध कामयाब रहा तो आने वाली पीढ़ियों के लिए वरदान साबित होगा। आइए जानते हैं आखिर ऐसा क्या हो रहा है-
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अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन में कटे अंगों और टूटी हड्डियों को तेजी से जोड़ने पर वैज्ञानिक शोध हो रहा है। ये शोध सैनिकों और आम लोगों के कटे अंगों को जोड़ने की चिकित्सा पद्धति के लिए कारगर होगा। कुछ दिन पहले अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) शिमला के आसमान में चक्कर काटते नजर आया था मगर अब यह गायब हो गया है।
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अंतरिक्ष यात्रियों में महिला अंतरिक्ष यात्री पेगी व्हिटसन बायो केमिस्ट्री की वैज्ञानिक हैं। इनमें बाकी पांच अंतरिक्ष यात्रा के विशेषज्ञ हैं। ये शोध कर रहे हैं कि लाइटिंग स्वास्थ्य को कैसे बदल सकती है। ये इस स्पेस स्टेशन में रहने वाले क्रू सदस्यों को कैसे ठीक-ठाक रख सकती है।

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यह भी शोध चल रहा है कि कैसे माइक्रो ग्रेविटी अंतरिक्ष में उगाए गए पौधों में जेनेटिक बदलाव ला सकती है। माइक्रो ग्रेविटी कैसे मानव शरीर के उत्तकों के पुनर्निर्माण को प्रभावित करती है। स्पेस में जिस तरह से ग्रेविटी घटी होती है, उसमें मानव शरीर के टिशू का तेजी से पुनर्निर्माण होता है।
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ये शोध उन सैनिकों और आम लोगों के लिए लाभदायी हो सकता है जिनके अंग कट जाते हैं। विभिन्न अंगों सहित टूटी हड्डियों के तेजी से जोड़ने पर भी बोन मेरो पर अनुसंधान चल रहा है।
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स्पेस स्टेशन के सभी छह सदस्य दिन में 16 बार सूर्योदय देखते हैं। इस पर भी शोध चल रहा है कि अलर्टनेस को बढ़ाने में और रात में नींद को बढ़ाने में इलेक्ट्रिक लाइटिंग कैसे काम कर सकती है।
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जब पृथ्वी पर ओजोन परत नहीं होगी तो उस स्थिति में मनुष्य सहित पृथ्वी पर रहने वाले तमाम जीव, पशु, पौधे सूर्य की अत्यंत खतरनाक किरणों के होने पर अंधता, कैंसर जैसी बीमारियों के अलावा वनस्पतियों पर इसका क्या असर रहेगा।

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मानव निर्मित इस सबसे बड़े आबादीयुक्त उपग्रह में वर्तमान में छह खगोल विज्ञानी सवार हैं। इस अंतरिक्ष यात्रा में अमेरिका से नासा कमांडर रॉबर्ट शेन किमब्रो और नासा की ही फ्लाइट इंजीनियर पेगी व्हिटसन हैं। रूस के फ्लाइट इंजीनियर एंड्रे बोरिसेंको, सरगे रिझीकोव और ओलेग नोविटस्कीय के अलावा फ्रांस के फ्लाइट इंजीनियर थॉमस पेसकेट भी इसमें रहते हैं।
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इस स्पेस स्टेशन में जाने का सिलसिला 30 अक्तूबर 2016 को शुरू हुआ और ये इसमें यात्री 4 मार्च 2017 तक रहेंगे। ये जानकारी अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी नासा के लिंडन बी जॉनसन स्पेस सेंटर हुस्टन टैक्सास ने इंटरनेट पर साझा की है। शिमला के लोग फिर कुछ दिन बाद इसे शाम के समय आसमान में देख सकेंगे।
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