मशहूर लेखिका और समाजसेवी सरोज वशिष्ठ के घर में आग लगने से दम घुटने के कारण उनकी मौत हो गई। शिमला के विकासनगर स्थित फ्लैट में 90 वर्षीय सरोज वशिष्ठ वर्षों से अकेली रह रही थीं। सुबह उनके घर में आग लगने की सूचना पड़ोसियों ने सबसे पहले फायर बिग्रेड और पुलिस को दी। बचाव दल ने मौके पर पहुंच दरवाजा तोड़ा तो वयोवृद्ध लेखिका बाथरूम में अचेत अवस्था में गिरी हुई थीं।
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मशहूर लेखिका सरोज वशिष्ठ के घर में आग, दम घुटने से मौत
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उन्हें अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। उनकी बेटी हैदराबाद और बेटे विदेश में रहते हैं। उन्हें हादसे की सूचना दे दी गई है। पुलिस ने आईजीएमसी शिमला में शव का पोस्टमार्टम कराया है। बेटी के आने के बाद सोमवार को उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।
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पुलिस के मुताबिक आग से एक कमरा, रसोईघर और बाथरूम जल गया है जबकि तीन कमरे सुरक्षित हैं। प्रथमदृष्टया आग लगने का कारण शार्ट सर्किट माना जा रहा है।
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कमरे में रखा हीटर सुरक्षित है, जिससे स्पष्ट है कि हीटर से घर में आग नहीं लगी है।
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एएसपी सिटी भजन देव नेगी के अनुसार जांच में सामने आया है कि सरोज वश्ष्ठि की मौत दम घुटने से हुई है। थाना छोटा शिमला में मुकदमा दर्ज कर छानबीन की जा रही है।
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कैदियों का जीवन संवारने में लगा दी जिंदगी- सरोज वशिष्ठ ने लेखन के साथ कैदियों का जीवन संवारने में अपनी जिंदगी लगा दी। कैदी उन्हें ‘मां’ बुलाते थे। वे पहली महिला आईपीएस किरण बेदी के साथ तिहाड़ जेल में कैदियों के लिए काम कर चुकी हैं।
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हिमाचल की जेलों में बंद कैदियों को नए सिरे से जीवन शुरू करने के लिए प्रोत्साहित करने की दिशा में उन्होंने बहुत काम किया। वह कैदियों की लिखीं कई कविताएं भी सामने लाईं। वे शिमला में काफी समय से रह रही थीं। वे कहानीकार के साथ अनुवादक और कई नाटकों की समीक्षक भी रहीं। सरोज आकाशवाणी दिल्ली में उद्घोषिका भी रह चुकी हैं।