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बापू का इस शहर से रहा गहरा नाता, स्वतंत्रता संघर्ष के दौरान कई बार कीं यात्राएं, देखिए तस्वीरें

Wed, 02 Oct 2019 10:39 AM IST
Krishan Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
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02 अक्तूबर 2019 को पूरा देश राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150वीं जयंती मनाएगा। हिमाचल में जगह-जगह अलग-अलग तरीकों से बापू की जयंती मनाने की तैयारी है। देवभूमि हिमाचल विशेषकर शिमला से बापू का गहरा नाता रहा। स्वतंत्रता के लिए संघर्ष के दौरान महात्मा गांधी ने कई बार शिमला की यात्राएं कीं। अंग्रेजों की ग्रीष्मकालीन राजधानी होने के कारण महात्मा गांधी को वार्ता के लिए कई बार शिमला का रुख करना पड़ा था।
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इतिहास के गर्भ में छिपे कई महत्वपूर्ण फैसले राजधानी शिमला में ही हुए। महात्मा गांधी पहली बार शिमला मदन मोहन मालवीय और लाला लाजपत राय के साथ 12 मई 1921 को तत्कालीन वायसराय लॉर्ड रीडिंग से मिलने आए थे। वह यहां जाखू इलाके में स्थित लाला मोहनलाल के बंगले पर भी रुके थे। 1931 में वायसराय लार्ड वेलिंग्टन से मिलने भी आए थे।
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वायसराय के इस भवन में अब भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान चल रहा है। इसके बाद इमरसन से मिलने इसी साल बापू बल्लभ भाई पटेल और जवाहरलाल नेहरू के साथ पहुंचे थे। यह बिल्डिंग एक आगजनी में ढह गई थी लेकिन इसका बाद में फिर से निर्माण किया जा चुका है। इसके बाद 1940 से 1946 के बीच बापू तीन बार शिमला आए। हिमाचल सूचना एवं जन संपर्क विभाग की पत्रिका हिमप्रस्थ ने भी महात्मा गांधी की शिमला यात्राओं का जिक्र किया है। 

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महात्मा गांधी
शिमला सम्मेलन के लिए वायसराय ने ली थी राय
शिमला सम्मेलन 25 जून 1945 ई. को हुआ था। शिमला में होने वाला यह एक सर्वदलीय सम्मेलन था। इसमें कुल 22 प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया था। हालांकि, महात्मा गांधी इस सम्मेलन का हिस्सा नहीं थे लेकिन वायसराय और कांग्रेस कार्यकारी समिति ने इस पर उनसे राय ली थी। सम्मेलन में भाग लेने वाले प्रमुख नेता पूर्व पीएम जवाहरलाल नेहरू, मुहम्मद अली जिन्ना, इस्माइल खां, सरदार वल्लभ भाई पटेल, अबुल कलाम आज़ाद, खान अब्दुल गफ्फार खां और तारा सिंह थे। मुस्लिम लीग की जिद के कारण यह सम्मेलन असफल हो गया था।
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मुस्लिम लीग ने शर्त रखी थी कि वायसराय की कार्यकारिणी परिषद में नियुक्त होने वाले सभी मुस्लिम सदस्यों का चयन वह स्वयं करेंगे। मुस्लिम लीग का यही अड़ियल रुख 25 जून से 14 जुलाई तक चलने वाले शिमला सम्मेलन की असफलता का प्रमुख कारण बना था।
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कालका-शिमला रेल से भी की थी यात्रा
महात्मा गांधी ने प्रसिद्ध पर्यटन रेल कालका-शिमला रेल से भी 1921 में यात्रा की थी। समरहिल स्थित राजकुमारी अमृतकौर का घर भी महात्मा गांधी की शिमला यात्राओं का साक्षी है।
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शिमला आने पर महात्मा गांधी अधिकतर मैनोर विला में ठहरे और यहीं रुककर उन ऐतिहासिक फैसलों पर मंथन हुआ जो देश की आजादी के लिए मील का पत्थर साबित हुए। समरहिल के मैनोर विला के अलावा जाखू का फायर ग्रोव व शांति कुटीर गांधी की शिमला यात्राओं का इतिहास खुद में समेटे हुए है। 12 मई 1921 को जब महात्मा गांधी तत्कालीन वायसराय से मिलने शिमला आए थे तो उस समय उन्होंने ईदगाह में रैली को भी संबोधित किया था।
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- फोटो : सोशल मीडिया
राजधानी शिमला में पानी की समस्या से महात्मा गांधी भी रू-ब-रू हो चुके हैं। वर्ष 1921 में महात्मा गांधी पहली बार शिमला आए थे। वह बालूगंज में शांति कुटीर में ठहरे थे। उन्हें शिमला के पहले ही दौरे में पानी की समस्या से जूझना पड़ा था। शिमला में पानी की समस्या देख महात्मा गांधी ने कहा था कि यहां तो एक दिन में एक लोटा पानी उपयोग करने में शर्म आती है। उन्होंने 14 मई, 1921 को लोअर बाजार में आर्य समाज सभागार में शिमला की महिलाओं को संबोधित किया। इसी तरह 15 मई 1921 को शिमला के ईदगाह मैदान में 15 हजार लोगों की भीड़ को संबोधित किया। 
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