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टैगोर ने भी नहीं सोचा था, घर का कभी ऐसा हाल होगा

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जिस कमरे में बैठक रबींद्रनाथ टैगोर ने नामी कविताएं लिखी, शिमला में स्थित वह रिहाइश खंडहर में तबदील हो गई है
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टैगोर ने भी नहीं सोचा था, घर का कभी ऐसा हाल होगा

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खंडहर में बदल रहे वुडफील्ड हाउस में देखने लायक अब कुछ खास नहीं बचा है। प्रदेश सरकार भी इसे सहेज नहीं पा रही है।
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टैगोर ने भी नहीं सोचा था, घर का कभी ऐसा हाल होगा

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राज्य भाषा एवं संस्कृति विभाग ने भी एक बार इसके लिए बजट देने की बात की थी, पर हुआ कुछ नहीं।

टैगोर ने भी नहीं सोचा था, घर का कभी ऐसा हाल होगा

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इस हेरिटेज भवन के जिस कमरे में रबींद्रनाथ टैगोर ने रचनाकर्म किया, उसमें एक 72 वर्षीय बुजुर्ग किरायेदार उर्मिला गुप्ता अकेले रहती हैं। उन्होंने स्वामी परमहंस योगानंदा के चित्र के साथ टैगोर का फोटो भी रखा है।
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यह भवन अब निजी प्रापर्टी है। इसके हिस्सेदार भी कई हैं। कई साल पहले टैगोर के पोते यहां आए थे।
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टैगोर ने भी नहीं सोचा था, घर का कभी ऐसा हाल होगा

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इस मकान में रबींद्रनाथ टैगोर ने आठ कविताएं लिखीं। इन्हें बाद में उनके संग्रह ‘सोनार तारी’ में संकलित किया गया।
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