वर्ष 1945 के शिमला सम्मेलन के दौरान पंडित जवाहर लाल नेहरू ने तत्कालीन शिमला स्थित आर्म्सडेल भवन की छत से स्थानीय लोगों को संबोधित किया था। नेहरू को जैसे ही यह सूचना मिली कि उनके समर्थकों की भारी भीड़ उन्हें सुनने के लिए एकत्र हुई है, वह खुशी में अपने कमरे की खिड़की से ही बाहर कूद गए।
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शिमला में इस भवन की खिड़की से कूदे थे नेहरू
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1943 में नेहरू पठानकोट से मंडी गाड़ी से पहुंचे। यहां पर उनका भव्य स्वागत हुआ। उन्हें घोड़े पर बैठाकर मंडी लाया गया। उन दिनों अंग्रेजों के खिलाफ भारत छोड़ो आंदोलन चल रहा था। पं. नेहरू ने सेरी चानणी से भाषण दिया जो अंग्रेजों को रास नहीं आया। इस पर अंग्रेज मंडी राजघराने से नाराज हो गए और जवाब तलब किया।
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शिमला में पंडित जवाहर लाल नेहरू अब्दुल गफ्फार खान के साथ।
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कैबिनेट मिशन के साथ वार्तालाप के पहले दिन 5 मई 1946 को पंडित जवाहरलाल नेहरू शिमला के वायसरीगल लॉज तक पैदल चलकर आए।
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पंडित जवाहर लाल नेहरू से मिलते लाहौल स्पीति के लोग।
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ओल्ड हिमाचल के जिलाध्यक्ष रहे स्व. चरण दास और महिला कांग्रेस की रमा डोगरा के साथ कुल्लू में पंडित जवाहर लाल नेहरू।
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कुल्लू स्थित कांग्रेस पार्टी कार्यालय के बाहर पंडित जवाहर लाल नेहरू का स्वागत करते ओल्ड हिमाचल के जिलाध्यक्ष चरण दास।
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चंबा में भूरि सिंह संग्रहालय का निरीक्षण करते पंडित जवाहर लाल नेहरू।
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भाखड़ा बांध के पावर हाऊस का बटन दबाकर शुभारंभ करते तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू।
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भाखड़ा बांध के रिजर्वेयर से पानी का प्रवाह देखते तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू।
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भाखड़ा बांध साइट पर जवाहर लाल नेहरू पंजाब के मुख्यमंत्री भैरों सिंह शेखावत के साथ।
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पंडित नेहरू जब भी भाखड़ा डैम पर चल रहे काम को देखने आते तो वे नंगल स्थित सतलुज सदन में आराम के लिए रूकते थे।