स्वास्थ्य महकमा मरीजों की सेहत से अजब खिलवाड़ कर रहा है। पेट और गुर्दे की बीमारियाें की जांच के लिए डॉक्टर साहब अल्ट्रासाउंड टेस्ट तो जरूरी बता रहे हैं, लेकिन टेस्ट के लिए मरीजों को अगले साल की डेट दी जा रही है।
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हैरान करने वाले यह हालात मुख्यमंत्री के गृह जिला मंडी के क्षेत्रीय अस्पताल के हैं। यकीन करना मुश्किल है कि अस्पताल में अल्ट्रासाउंड कराने के लिए अब तक 60 मरीजों को जनवरी 2019 की तारीख दी जा चुकी है।
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यानी बीमारी जांचने के लिए मरीजों को कम से कम चार महीने इंतजार करना होगा। शुक्रवार को अस्पताल के हालात का अमर उजाला ने जायजा लिया तो ऐसे कई मामले सामने आए। जिला के दूरदराज क्षेत्र से आई रश्मि ने जैसे ही काउंटर पर डेट ली तो उसे अगले साल की 8 जनवरी 2019 की तिथि दी गई।
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उसके चेहरे में चिंता की लकीरें खिंच गईं। इससे पहले बृजलाल, कृष्णा, अंबिका, गुड़िया, पूनम, हेमराज आदि को भी 7 जनवरी 2019 की तारीख दी गई। क्षेत्रीय अस्पताल के हालात पर एमएस केएस मल्होत्रा ने कहा कि अस्पताल में मात्र एक ही डॉक्टर और एक ही मशीन है।
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रोजाना अल्ट्रासाउंड के लिए लोगों की भारी संख्या हो जाती है। एक डॉक्टर अधिकतर 30 से 40 अल्ट्रासाउंड कर पाता है। इसलिए तिथियां अगले साल तक पहुंच गई हैं।
निजी क्लीनिकों में 2000 हो रहे खर्च
सरकारी अस्पताल में जहां आरकेएस की दरें 400 तक हैं, वहीं लोगों को बाहर 1500 से 2000 रुपये देकर अल्ट्रासाउंड करवाना पड़ रहा है।