वाहन खरीदने और बेचने के लिए अब आपको ज्यादा औपचारिकताएं पूरी नहीं करनी होगी। आपको अब एनओसी तक की जरूरत नहीं पड़ेगी। जी हां, अब आप बिना एनओसी के भी वाहन खरीद और बेच सकेंगे। आइए जानते हैं ये कैसे संभव होगा-
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लोगों को वाहन खरीदने और बेचने के लिए एनओसी की जरूरत नहीं पड़ेगी। सरकार इस सिस्टम को खत्म करने जा रही है। सरकार वाहन -4 आपरेटिव सिस्टम लागू करने जा रही है। वाहन निर्माता कंपनी गाड़ियां बनाने के साथ-साथ इनके चैसी और इंजन नंबर को सॉफ्टवेयर में अपलोड करेगी।
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यह व्यवस्था हिमाचल में लागू होने वाली है। परिवहन विभाग ऑनलाइन इन नंबर को देखकर ही गाड़ियों की रजिस्ट्रेशन करेगा। बिना अपलोड हुए चैसी और इंजन नंबर की गाड़ियां हिमाचल में रजिस्टर्ड नहीं होंगी।
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हिमाचल में अभी वाहन -1 आपरेटिव सिस्टम के तहत गाड़ियों की रजिस्ट्रेशन की जा रही थी। परिवहन विभाग के का मानना है कि सिस्टम ऑनलाइन होने से लोगों को वाहन खरीदने और बेचने में एक-दूसरे से एनओसी लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
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अतिरिक्त परिवहन आयुक्त विनय सिंह ने बताया कि हिमाचल में अभी इस सिस्टम को शिमला शहरी और धर्मशाला में शुरू किया जा रहा है। इसके बाद इसे अन्य शहरों में भी लागू किया जाएगा। आरटीओ शिमला प्रशांत देष्टा ने बताया कि इस ऐप के लागू किए जाने से वाहन चोरी पर भी लगाम लगाई जा सकेगी। हिमाचल में अब जो भी वाहनों का पंजीकरण होगा। वह वाहन -4 आपरेटिव सिस्टम के तहत ही किया जाएगा।
कंपनी गाड़ी तैयार कर उसका चैसी और इंजन नंबर सॉफ्टवेयर पर अपलोड करेगी। इसके बाद गाड़ी शो रूम आएगी। यहां व्यक्ति गाड़ी खरीदेगा। उसके बाद इस गाड़ी की रजिस्ट्रेशन विभाग के पास होगी। वाहन रजिस्ट्रेशन करने से पहले अफसर गाड़ी का चैसी और इंजन नंबर ऑनलाइन चैक करेगा। डिटेल सही पाई जाती है तो गाड़ी की रजिस्ट्रेशन होगी। अगर यह डिटेल कंपनी के साथ मेल नहीं खाती है तो विभाग गाड़ी की रजिस्ट्रेशन नहीं करेगा।