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पीटीए, पैट और पैरा अध्यापकों को नियमित करने में फंसा पेच

Mon, 03 Dec 2018 10:10 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
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लोकसभा चुनाव से पहले हिमाचल में हजारों पीटीए, पैट और पैरा शिक्षकों को नियमित करने की जयराम सरकार की मुहिम में पेच फंस गया है।  सीएम जयराम ठाकुर ने ओकओवर में अधिकारियों की बैठक बुलाकर इस मामले में मंत्रणा की। लंबी चर्चा के बाद भी इन अस्थायी शिक्षकों को नियमित करने का रास्ता नहीं निकाला जा सका।
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बैठक में यह बात निकली कि सरकार इस मसले पर न तो अध्यादेश ला पाने की स्थिति में है और न ही इसके समाधान के लिए धर्मशाला में होने जा रहे शीत सत्र में बिल पारित किया जा सकेगा। सुप्रीम कोर्ट के यथास्थिति बनाए रखने के आदेश को दिल्ली जाकर वहीं चुनौती देनी होगी। हालांकि, मामले में आगे क्या करना है इस पर फैसला नहीं हो सका है।
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ओकओवर शिमला में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने सुबह करीब 10 बजे मुख्य सचिव, महाधिवक्ता समेत विभिन्न विभागों के प्रशासनिक सचिवों को बुलाया। सचिव शिक्षा से पीटीए, पैट और अन्य अस्थायी शिक्षकों के मुद्दे पर जानकारी ली गई। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर इन शिक्षकों को नियमित करने के लिए कई बार अध्यादेश लाने या कानून में संशोधन की बात कर चुके हैं।

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हजारों पीटीए शिक्षकों को अनुबंध पर लाने के चार साल बाद भी नियमित नहीं किया जा सका, जबकि सरकार की नीति तीन साल बाद अनुबंध शिक्षकों को नियमित करने की है। अधिकारियों ने सीएम को बताया कि इस बारे में सुप्रीम कोर्ट ने यथास्थिति बनाए रखने की बात की है। इसका तोड़ भी सुप्रीम कोर्ट जाकर ही निकल सकता है। मुख्य सचिव बीके अग्रवाल ने इन शिक्षकों के मसले पर रविवार को चर्चा किए जाने की पुष्टि की, मगर उन्होंने कहा कि क्या करना है, अभी इस पर कोई फैसला नहीं लिया गया।
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बैठक में एनजीटी के शिमला शहरी क्षेत्र में ढाई मंजिला से ज्यादा भवन बनाने पर रोक लगाने के मसले पर भी चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने इस बारे में अदालत में ठीक से अपना पक्ष रखने के निर्देश दिए गए। राज्य में अतिक्रमण के मामलों में तत्काल कार्रवाई करने, अदालती फैसलों की अनुपालना ठीक से करने जैसे निर्देश भी जारी किए। पीडब्ल्यूडी, राजस्व, वन, नगर नियोजन आदि के सचिवों से भी विभिन्न अदालती निर्णयों पर चर्चा की गई।
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शिक्षा के अधिकार कानून और एनसीटीई के मापदंडों तथा नियमों के विपरीत भर्ती बताए जा रहे इन शिक्षकों के नियमितीकरण में कई तकनीकी और कानूनी पहलू आड़े आ रहे हैं। कुछ लोग इस तरह की भर्ती के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट तक चले गए। अस्थायी तौर पर करीब एक दशक पहले भर्ती हुए इन शिक्षकों को नियमित करने के वर्षों से वादे किए जा रहे हैं, मगर कोई भी सरकार ऐसा नहीं कर पाई।
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