नंगे पांव दौड़कर जीता था गोल्ड मेडल, आज मदद को तरस रही है ये बेटी
Sat, 06 Aug 2016 09:10 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, शिमला
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बख्शो देवी, नाम तो आपको याद होगा ही। यह वही उड़नपरी है जिसने नंगे पांव जीरो डिग्री तापमान में गोल्ड मेडल जीतकर सुर्खियां बटोरी थी। सपना तो देश का नाम रोशन करने का था मगर बख्शो के साथ कुछ ऐसा हुआ कि इसे अब फिर से घर बैठकर काम करना पड़ रहा है।
- फोटो : अमर उजाला
बख्शो देवी, नाम तो आपको याद होगा ही। यह वही उड़नपरी है जिसने नंगे पांव जीरो डिग्री तापमान में गोल्ड मेडल जीतकर सुर्खियां बटोरी थी। सपना तो देश का नाम रोशन करने का था मगर बख्शो के साथ कुछ ऐसा हुआ कि इसे अब फिर से घर बैठकर काम करना पड़ रहा है।
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हिमाचल के ऊना की रहने वाली बख्शो उस समय सबकी चहेती बन गई थी जब उसने जीरो डिग्री तापमान के बीच नंगे पांव दौड़कर 5000 मीटर की रेस जीती थी। बख्शो ने कई बड़ी रेसर को पछाड़ कर गोल्ड मेडल जीता था।
- फोटो : अमर उजाला
हिमाचल के ऊना की रहने वाली बख्शो उस समय सबकी चहेती बन गई थी जब उसने जीरो डिग्री तापमान के बीच नंगे पांव दौड़कर 5000 मीटर की रेस जीती थी। बख्शो ने कई बड़ी रेसर को पछाड़ कर गोल्ड मेडल जीता था।
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इसके बाद से बख्शो सुर्खियों में आ गई। मगर एक झौंपड़ी में रहने वाली यह बेटी अपने दम पर आगे बढ़ने में सक्षम नहीं थी। उसकी मां के लिए दो जून की रोटी कमाना भी मुश्किल हो रहा था। ऐसे में उसे ट्रेनिंग दिलवाना तो बड़ी दूर की बात थी।
- फोटो : अमर उजाला
इसके बाद से बख्शो सुर्खियों में आ गई। मगर एक झौंपड़ी में रहने वाली यह बेटी अपने दम पर आगे बढ़ने में सक्षम नहीं थी। उसकी मां के लिए दो जून की रोटी कमाना भी मुश्किल हो रहा था। ऐसे में उसे ट्रेनिंग दिलवाना तो बड़ी दूर की बात थी।
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ऐसे में बख्शो को घर का काम भी करना पड़ा। मगर मीडिया में चर्चा होने के बाद कई लोगों ने बख्शो की मदद को हाथ बढ़ाए। उसके अकाउंट में लाखों रुपए भी जमा हो गए। इसके बाद सरकार के कान पर भी जूं रेंगी और कई नेता आगे आए
- फोटो : अमर उजाला
ऐसे में बख्शो को घर का काम भी करना पड़ा। मगर मीडिया में चर्चा होने के बाद कई लोगों ने बख्शो की मदद को हाथ बढ़ाए। उसके अकाउंट में लाखों रुपए भी जमा हो गए। इसके बाद सरकार के कान पर भी जूं रेंगी और कई नेता आगे आए
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नेताओं ने घोषणाएं की कि बख्शो को स्पोर्ट्स हॉस्टल में प्रशिक्षण दिया जाएगा। एडमिशन की प्रक्रिया भी पूरी हुई और बख्शो का वह सपना भी सच दिखने लगा कि वह प्रदेश और देश का नाम अब जल्द ही रोशन कर सकेगी। घर का काम नहीं बल्कि अब वह ट्रेनिंग लेकर आगे बढ़ सकेगी, मगर ऐसा हो न सका।
- फोटो : अमर उजाला
नेताओं ने घोषणाएं की कि बख्शो को स्पोर्ट्स हॉस्टल में प्रशिक्षण दिया जाएगा। एडमिशन की प्रक्रिया भी पूरी हुई और बख्शो का वह सपना भी सच दिखने लगा कि वह प्रदेश और देश का नाम अब जल्द ही रोशन कर सकेगी। घर का काम नहीं बल्कि अब वह ट्रेनिंग लेकर आगे बढ़ सकेगी, मगर ऐसा हो न सका।
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सरकार की ये घोषणाएं बस कोरी घोषणाएं ही रह गई। न तो बख्शो को प्रशिक्षक मिला न हॉस्टल में दाखिला। खेल विभाग ने एक दो ट्रायल जो करवाए उसमें बख्शो बिना ट्रेनिंग के दौड़ी तो जरूर मगर जीत से दूर रह गई।
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सरकार की ये घोषणाएं बस कोरी घोषणाएं ही रह गई। न तो बख्शो को प्रशिक्षक मिला न हॉस्टल में दाखिला। खेल विभाग ने एक दो ट्रायल जो करवाए उसमें बख्शो बिना ट्रेनिंग के दौड़ी तो जरूर मगर जीत से दूर रह गई।
अब हालत यह है कि बख्शो को ट्रेनिंग की बजाए मजबूर होकर सुबह शाम वही पुराना घर का काम करना पड़ रहा है। बख्शो स्कूल जाती है लेकिन घर आकर उसे ट्रेनिंग नहीं बल्कि घर के कामों में मां की मदद करनी होती है। उसे खेल विभाग और सरकार से कोई मदद नहीं मिल पा रही है। जहां पहले बख्शो को तेजरर्रार एथलीट बनाने की बातें हो रही थी, वहीं अब उसे ट्रेनिंग तक देने से आनाकानी हो रही है।
- फोटो : अमर उजाला
अब हालत यह है कि बख्शो को ट्रेनिंग की बजाए मजबूर होकर सुबह शाम वही पुराना घर का काम करना पड़ रहा है। बख्शो स्कूल जाती है लेकिन घर आकर उसे ट्रेनिंग नहीं बल्कि घर के कामों में मां की मदद करनी होती है। उसे खेल विभाग और सरकार से कोई मदद नहीं मिल पा रही है। जहां पहले बख्शो को तेजरर्रार एथलीट बनाने की बातें हो रही थी, वहीं अब उसे ट्रेनिंग तक देने से आनाकानी हो रही है।