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परिवारवाद: हिमाचल में बेटों का भविष्य संवारने में जुटे हुए हैं ये नता

Fri, 15 Mar 2019 01:07 PM IST
अरविन्द ठाकुर धर्मेंद्र पंडित, अमर उजाला, शिमला
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हिमाचल में भी लोकतंत्र पर परिवारवाद हावी है। राज्य में चारों संसदीय क्षेत्रों में बड़े नेता अपने पुत्रों के लिए टिकट झटकने को बेताब हैं। भाजपा और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अपने परिवार के सदस्यों को पार्टी से टिकट दिलाने की जुगत में लगे हैं। पार्टी की ओर से कई नेताओं को चुनाव मैदान में उतरने का ऑफर दिया जा रहा है लेकिन ये नेता खुद चुनाव लड़ने के बजाय अपनी संतानों को टिकट दिलाने की पैरवी करने में लगे हैं।
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यही नहीं इन नेताओं की ओर से पार्टी नेतृत्व को जीतने तक की गारंटी भी दी जा रही है। हमीरपुर संसदीय क्षेत्र से कांग्रेस विधायक राजेंद्र राणा अपने बेटे अभिषेक राणा को चुनाव मैदान में उतराने की पैरवी कर रहे हैं जबकि कांगड़ा संसदीय क्षेत्र से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जीएस बाली अपने बेटे रघुवीर सिंह बाली की किस्मत आजमाना चाहते हैं।
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कांगड़ा से कभी दिग्गज कांग्रेस नेता रहे पंडित संतराम के पुत्र सुधीर शर्मा पहले से ही हिमाचल कांग्रेस की राजनीति में खासे सक्रिय हैं। कांगड़ा से वह वीरभद्र की पसंद बने हुए हैं। इसी तरह मंडी की सियासत के पंडित सुखराम भारतीय जनता पार्टी से अपने पोते आश्रय शर्मा को लोकसभा चुनाव में टिकट दिलाना चाहते हैं।

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सुखराम के पुत्र अनिल शर्मा पहले से ही जयराम सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं। पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के बेटे विक्रमादित्य को भी मंडी संसदीय क्षेत्र से चुनाव मैदान में उतारने की चर्चाएं हो रही हैं। हालांकि विक्रमादित्य ने यह भी स्पष्ट किया है कि अगर पार्टी की ओर से उन्हें टिकट दिया जाता है तो पीछे नहीं हटेंगे। यहां से वीरभद्र की पत्नी प्रतिभा सिंह भी सांसद रह चुकी हैं।
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हिमाचल के चारों संसदीय क्षेत्रों में न तो भाजपा की ओर से प्रत्याशी को चुनाव मैदान में उतारा गया है और न ही कांग्रेस ने किसी को टिकट देने की घोषणा की है। दोनों दल एक दूसरे पर नजर बनाए हुए हैं कि आखिर भाजपा और कांग्रेस किस प्रत्याशी को चुनाव मैदान में उतारती है। 
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