हिमाचल में भी लोकतंत्र पर परिवारवाद हावी है। राज्य में चारों संसदीय क्षेत्रों में बड़े नेता अपने पुत्रों के लिए टिकट झटकने को बेताब हैं। भाजपा और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अपने परिवार के सदस्यों को पार्टी से टिकट दिलाने की जुगत में लगे हैं। पार्टी की ओर से कई नेताओं को चुनाव मैदान में उतरने का ऑफर दिया जा रहा है लेकिन ये नेता खुद चुनाव लड़ने के बजाय अपनी संतानों को टिकट दिलाने की पैरवी करने में लगे हैं।