ज्वालाजी
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उनके पौत्र कंवर नौनिहाल सिंह ने मंदिर के मुख्य दरवाजों पर चांदी के पत्र चढ़वाए थे। शक्तिपीठ ज्वालाजी अपने आप में इसलिए भी अनूठा है क्योंकि यहां पर मूर्ति पूजा नहीं होती। मंदिर के अंदर माता की नौ ज्योतियां हैं जिन्हें, महाकाली, अन्नपूर्णा, चंडी, हिंगलाज, विंध्यावासनी, महालक्ष्मी, सरस्वती, अम्बिका, अंजीदेवी के नाम से जाना जाता है। मां ज्वाला को 51 शक्तिपीठों में सर्वोपरि माना गया है। मंदिर के समीप में ही बाबा गोरखनाथ का मंदिर है जिसे गोरख डिब्बी से जाना जाता है।