देवभूमि की इस बावड़ी का पानी बड़ा चमत्कारी माना जाता है। कई गहरे राज समेटे इस बावड़ी में नहाने के लिए दूर दूर से महिलाएं पहुंचती हैं। एक श्राप से इसका पानी जादुई बन गया था। यह बावड़ी हिमाचल के जिला कांगड़ा के पालमपुर स्थित अगोजर में हैं। आइए जानते हैं पूरी कहानी-
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कहते हैं एक ऋषि के श्राप के कारण बावड़ी का पानी ऐसा हो गया था। ऐसी मान्यता है कि एक बार एक ऋषि यहां पर इस बावड़ी के अंदर छिपकर काफी वर्षों से तपस्या में लीन था। बाद में जब देवताओं को इसका पता चला तो वे डर गए।
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उन्होंने समझा कि कड़ी तपस्या के बाद यह ऋषि देवलोक पर राज कर सकता है। इसके बाद देवराज ने ऋषि की तपस्या भंग करने के बारे में सोचा। उसने देवलोक से अप्सराओं को ऋषि की तपस्या को भंग करने के लिए भेज दिया।
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इन अप्सराओं ने वहां आकर पहले तो नाच-गान किया फिर बाद में उस बावड़ी में नहाने लग पड़ीं। इससे ऋषि की तपस्या भंग हो गई और वे गुस्से में आ गए।
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उन्होंने श्राप देते हुए कहा कि अप्सराएं अविवाहित होते हुए भी गर्वभती हो जाएं। इस श्राप को सुनकर देवलोक में हड़कंप मच गया। देवता तुरंत ऋषि के पास पहुंचे और श्राप वापस लेने की प्रार्थना की। बाद में ऋषि शांत हुए।
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उन्होंने कहा कि जो इस पानी से नहाकर मंदिर में ऋषि की पूजा करेगा उसकी चर्म रोगों से मुक्ति मिल जाएगी और जो औरतें निसंतान होंगी, उनके यहां संतान सुख मिलेगा। तब से लेकर आज तक यहां पर दूर-दूर से लोग आकर अपनी-अपनी समस्याओं से मुक्ति पाते हैं।
वैसे तो हर वर्ष यहां पर लोगों का आना-जाना लगा रहता है लेकिन अप्रैल से जुलाई महीने के मंगल और रविवार के दिन काफी भीड़ रहती है। इन दिनों बावड़ी का पानी भी बढ़ जाता है। बावड़ी के साथ ही एक पीपल का पेड़ और शिव मंदिर भी है जो लोगों की हर मनोकामना को पूरी करते हैं।