करीब दो दशक से यहां तप कर रहे महंत आकाश गिरी बताते हैं कि यह वह स्थान है, जहां पर कई बार मृत्यु के बाद पुण्य आत्माएं भगवान शंकर के लोक को जाते हुए देखी जा सकती हैं। यहां पर तप करने वाला मनवांछित वरदान पाता है। समुद्रतल से धनछौ पड़ाव 9 हजार फीट की ऊंचाई पर है। इसे यात्रा का आधार शिविर भी कहा जाता है।