सोने-चांदी से सजे देवी-देवताओं के रथ। देव ध्वनियों पर देवी-देवताओं के साथ मदमस्त नाचते-गाते देवलु। चहुं ओर ढोल-नगाड़े, शहनाई, रणसिंघा, घंटी, थाल और करनाल की सुरमयी गूंज। अंतरराष्ट्रीय महाशिवरात्रि महोत्सव मंडी में राजदेवता माधोराय की शाही जलेब में देवलोक से इस नजारे की एक झलक पाने के लिए आस्था ऐसी उमड़ी कि छोटी काशी छोटी पड़ गई। माधोराय मंदिर से पड्डल मैदान तक हर तरफ लोग ही लोग दिखाई दिए। छोटी काशी में पांव धरने तक की जगह नहीं बची। जलेब को देखने के लिए भी लोगों को बहुत अधिक जद्दोजहद करनी पड़ी। जलेब देखने के लिए पहले से ही अधिकतर लोग अपने लिए जगह बुक कर चुके थे।
लोगों को जहां पर भी जगह मिली वहीं खड़े हो गए। हजारों लोग मंडी के सेरी मंच पर पहले ही डेरा डाले हुए थे। रास्ते के दोनों ओर लोग जलेब का बेसब्री से इंतजार करते दिखे। जैसे ही जलेब निकली, हर चेहरे पर अनोखी मुस्कान बिखर गई। जलेब का नजारा कैद करने के लिए हर कोई मोबाइल फोन और कैमरा ताने खड़ा रहा। जलेब जब निकली तो एक से बढ़कर एक प्रदर्शनियों ने सबका मन मोह लिया। अलग-अलग जिलों से आए सांस्कृतिक दलों को देखने के लिए हर ओर लोग टकटकी लगाए खड़े थे।