इस स्वरूप को शिवलिंग पर उकेरने के महत्व को लेकर एक कहानी प्रचलित है। मान्यता है कि प्राचीन काल में स्वयंभू शिवलिंग पर एक गाय हर रोज दूध दिया करती थी, लेकिन इसकी किसी को जानकारी नहीं थी। एक दिन जब गाय ने दूध नहीं दिया तो मालिक को शक पड़ गया कि कोई गाय का दूध निकाल लेता है।