आज हम आपको ऐसी जगह से वाकिफ करवाने जा रहे हैं जहां टोपी आपकी तकदीर का फैसला करती है। जानकर हैरानी हुई होगी लेकिन यह सच है। जानिए इसके बारे में। इनपुट: रमेश नेगी फोटो: सोशल मीडिया
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यकीन मानिए, यहां टोपियां तय करती हैं आपकी तकदीर
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हिमाचल प्रदेश्ा के किन्नौर जिले के यूला कंडा में झील के बीच भगवान श्रीकृष्ण का मंदिर स्थित है। पवित्र झील के बारे में कहा जाता है कि इसका निर्माण पांडवों ने वनवास के समय किया था। उसके बाद झील के बीच कृष्ण मंदिर का निर्माण किया गया। इस मंदिर की खासियत यह है कि इसमें हर धर्म के लोग दर्शन कर सकते हैं।
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समुद्रतल से 12000 फीट की ऊंचाई पर स्थित यूला कंडा जन्माष्टमी उत्सव का इतिहास बुशहर रियासत से जुड़ा है। मान्यता है कि तत्कालीन बुशहर रियासत के राजा केहरी सिंह के समय इस उत्सव को मनाने की परंपरा शुरू हुई थी।
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उस समय छोटे स्तर पर मनाए जाने वाले इस उत्सव को भले आज जिला स्तरीय का दर्जा मिल चुका है, लेकिन मेले को मनाने की परंपरा आज भी सदियों पुरानी है।
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यूला कंडा में भगवान श्रीकृष्ण मंदिर के साथ बहती झील में जन्माष्टमी के दिन किन्नौरी टोपी उल्टी करके डाली जाती है। अगर टोपी बिना डूबे तैरती हुई दूसरे छोर तक पहुंच जाती है तो समझो आपकी मनोकामना पूरी। भाग्य आपका साथ देगा और आने वाला साल भी आपके लिए खुशहाली लेकर आएगा।
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अगर टोपी डूब गई तो ये मान्यता है कि आने वाला साल आपके लिए अच्छा नहीं है। आपके साथ कुछ अनिष्ट होने वाला है। इसे भी देखें, फटी रह जाएंगी आंखें जब देखेंगे ठगी का ये नया तरीका
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यहां सिर्फ किन्नौर ही नहीं बल्कि शिमला और अन्य जिलों के लोग भी अपना भाग्य आजमाने के लिए आते हैं। यहां पहुंचने पर टूरिस्ट भी अपने आप को ऐसा करने से रोक नहीं पाते हैं।
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वहीं लोग पवित्र झील की परिक्रमा करना नहीं भूलते। मान्यता है कि इस झील की परिक्रमा करने से पापों से मुक्ति मिल जाती है। झील के बीचों-बीच मंदिर में विराजमान भगवान कृष्ण से सुख-शांति का आशीर्वाद भी मिलता है।
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दूरदराज क्षेत्रों के लोग उत्सव से एक दिन पहले ही यूला कंडा पहुंच जाते हैं। यहां पर मंदिर कमेटी की ओर से उनके रहन-सहन और खानपान की उचित व्यवस्था की जाती है।