शिमला के आईजीएमसी अस्पताल में सनसनी फैल गई। जिस मरीज को डॉक्टरों ने मृत बता दिया वही थोड़ी देर बाद फिर से जीवित हो गया। इस घटना के बाद से अस्पताल पर सवाल खड़े हो गए हैं।
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जानकारी के अनुसार लक्कड़ बाजार के रहने वाले मुनिश्वर मेहता तीन दिन पहले आईजीएमसी में भर्ती हुए थे। उन्हें किडनी से संबंधी दिक्कत आने के बाद डॉक्टरों ने अस्पताल में भर्ती किया था। तीन दिन से इनका अस्पताल में डायलिसिस चल रहा था।
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सोमवार सुबह करीब दस बजे अचानक मरीज के शरीर की हरकतें बंद हो गई। ये एकदम निर्जीव हो गया। डॉक्टरों ने इसे चैक किया और मरा हुआ करार दे दिया। हालांकि, अभी औपचारिक तौर पर इसकी मृत्यु की सूचना नहीं दी गई थी मगर परिजनों ने डॉक्टरों के कहे अनुसार ही अपने बाकी रिश्तेदारों को भी इसकी सूचना दे दी।
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वहीं दूसरी और डॉक्टर मरीज को पंपिग और छाती पर प्रैशर आदि डालकर रिवाइव करने की आखिरी कोशिश कर रहे थे कि अचानक मरीज की सांसे फिर चलने लगी। ये सब देख डॉक्टर खुद भी हैरान हो गए। थोड़ी ही देर बाद यह नॉर्मल भी हो गया।
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इसके बाद मरीज को तुरंत आईसीयू ले जाया गया। दोपहर बाद हालत सामान्य होने पर इसे मेल मेडिकल यूनिट में शिफ्ट कर दिया गया। घटना को लेकर मरीज के परिजनों ने गहरा रोष जताया और अस्पताल की कार्यप्रणाली को कोसा।
वहीं, आईजीएमसी प्रिंसिपल डॉ. अशोक शर्मा ने बताया कि डायलिसिस के दौरान मरीज की हार्ट बीट रुक गई थी और यह कोलेप्स हो गया था। लेकिन बाद में डॉक्टरों ने प्रैशर के जरिए इसे रिवाइव कर दिया।