शक्ल से भारतीय, अक्ल से अंग्रेज बना दूंगा- 1834 में भारत भ्रमण के दौरान लॉर्ड मैकाले ने कहा था कि मैं भारत की शिक्षा व्यवस्था को ऐसा बना दूंगा कि इसमें पढ़कर निकलने वाला व्यक्ति शक्ल से भारतीय और अक्ल से पूरा अंग्रेज होगा।
पुस्तकालय में हैं इन अंग्रेजों की पुस्तकें- इस पुस्तकालय में 1854 में छपी ओस्टन हेनरी लॉर्ड की लिखित पुस्तक नीनवे, 1889 की छपी जेबी प्रिस्टली की मिडनाइट ऑन द डेजर्ट, 1852 में प्रकाशित हिस्ट्री ऑफ फेडरिक ऑफ पर्शिया, 1858 में एचई कार्डिनल वाइसमैन की द लॉस्ट फॉर पोपस रोमन देयर, 1860 की हेनरी हालम की द स्टेट ऑफ यूरोप, सर विलियम विलसन की ए हिस्टरी ऑफ ब्रिटिश इंडिया आदि के अलावा कई अन्य पुस्तकें मौजूद हैं।