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इस वजह से पंचायत प्रतिनिधि बनना चाहते हैं प्रत्याशी, सर्वे में सामने आए कई रोचक तथ्य

Mon, 11 Jan 2021 06:45 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
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पंचायत चुनाव हिमाचल - फोटो : अमर उजाला
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के अंतरविषयक विभाग ने मतदाताओं के व्यवहार का अध्ययन करने के लिए सर्वे करवाया है। इसमें कई रोचक तथ्य सामने आए हैं। सर्वेक्षणकर्ता डॉ. बलदेव सिंह नेगी, डॉ. देवेंद्र कुमार शर्मा ने कहा कि 67.7 प्रतिशत मतदाताओं ने बताया कि स्थानीय निकाय के चुनाव में राजनीतिक दलों का प्रभाव फिर भी नजर आता है। इसके विपरीत 79.8 फीसदी उत्तरदाता का मानना है कि वे पंचायत चुनावों में दल संबंद्धता के बजाए उम्मीदवार की व्यक्तिगत क्षमता को देख मतदान करते हैं।
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पंचायत चुनाव - फोटो : अमर उजाला
56.4 फीसदी उत्तरादाओं ने माना कि पंचायत चुनाव में जाति, वंश और क्षेत्र की कोई भूमिका नही होती है। 64.8 फीसदी का मानते है कि जाति, वंश और क्षेत्र की पहचान के आधार पर यदि अभिभावक मत देने के लिए प्रेरित भी करें तो भी युवा मतदाता बिना किसी प्रभाव के मत का उपयोग करता है।
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पंचायत चुनाव हिमाचल - फोटो : अमर उजाला
67.7 फीसदी का मानना है कि मतदान के समय सामाजिक संबंध ज्यादा भूमिका निभाते हैं जिस वजह से स्थानीय वास्तविक मुद्दे गौण हो जाते हैं। सर्वेक्षण में 71.8 फीसदी ने माना कि लोग पैसा कमाने के लिए ही पंचायत के प्रतिनिधि बनना चाहते हैं।  65.8 फीसदी ने कहा कि राज्य में चुनाव में धन का इस्तेमाल पहले के मुकाबले बढ़ता जा रहा है। 

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पंचायत चुनाव
27.6 फीसदी ने माना कि समर्थक इन चुनावों उम्मीदवार के खर्चों का वहन करते हैं , चुनाव जीतने के बाद इसकी भरपाई के लिए सरकारी पैसों का दुरुपयोग होता है। 63.2 फीसदी ने माना कि राष्ट्रीय मुद्दों का पंचायती चुनाव में विशेष प्रभाव नहीं पड़ता, 66 फीसदी ने माना स्थानीय मुददे मतदाताओं के मतदान व्यवहार को प्रभावित करते हैं। 
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पंचायत चुनाव
30.4 फीसदी कामानना है वर्तमान विवादित कृषि कानून बिलों का मतदान व्यवहार पर असर दिख सकता है। पंचायती राज में महिलाओं और अन्य आरक्षित वर्गों के लिए विभिन्न पदों पर आरक्षरण के बावजूद लोगों की चेतना के विकास में कम ही प्रभाव नजर आया है। सर्वे 12 जिलों के 45 खंडों की 327 पंचायतों के 514 उत्तरदाताओं की राय पर आधारित है। 
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