वर्ष 1989 में वर्तमान में कुल्लू सदर से विधायक महेश्वर सिंह के सांसद बनने पर बंजार में भाजपा के लिए नेतृत्व के लिए संकट पैदा हो गया था। ऐसे में कर्ण सिंह ने प्राइवेट नौकरी छोड़ राजनीति में हाथ आजमाया और वह इसमें सफल भी हुए। लोगों के दिलों में राज कर वह बंजार विधानसभा से तीन बार विधायक रहने वाले पहले नेता बने।
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भाजपा की चार्जशीट में कर्ण सिंह ऐसे इकलौते कांग्रेस नेता थे जिनपर कोई गंभीर आरोप नहीं लगाए गए। 14 अक्तूबर 1957 को कुल्लू के राज परिवार में जन्में कर्ण सिंह की प्राथमिक शिक्षा कुल्लू के सरकारी स्कूल में हुई थी। इसके बाद उन्होंने पुणे से राजनीतिक शास्त्र (ऑनर्स) में स्नातक की डिग्री हासिल की। कुछ समय निजी क्षेत्र में नौकरी करने के बाद कर्ण सिंह महज 32 वर्ष की आयु में भाजपा की टिकट पर पहली बार विधायक बने थे।
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2009 के लोकसभा चुनाव से पहले उन्होंने कांग्रेस पार्टी में प्रवेश किया तथा मंडी लोकसभा क्षेत्र से पार्टी के तत्कालीन प्रत्याशी वीरभद्र सिंह के कवरिंग कैंडिडेट रहे। 2012 में वह कांग्रेस के टिकट पर बंजार विधानसभा क्षेत्र से तीसरी बार विधायक बने।
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साल 2007 में भाजपा की गुटबाजी के चलते कर्ण सिंह ने भाजपा को छोड़ बसपा का दामन भी थामा था। साल 2007 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर बंजार विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा।
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कर्ण सिंह ने प्रारंभिक शिक्षा कुल्लू में पूरी की और पुणे में राजनीति शास्त्र बीए ऑनर्स की शिक्षा प्राप्त की। बीए ऑनर्स की शिक्षा ग्रहण करने के बाद कर्ण सिंह ने प्रबंधन क्षेत्र में कई प्रकार की परीक्षाएं पास की और मुंबई, चंडीगढ़, ग्वालियर में प्रबंधन क्षेत्र में नौकरी की जहां उन्हें बेस्ट मेनेंजमेंट तथा शिक्षा के क्षेत्र में बेस्ट रिर्सचर का राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला।
2012 में वह कांग्रेस के टिकट पर बंजार विधानसभा क्षेत्र से तीसरी बार विधायक बने। 27 अगस्त 2015 को उन्होंने आयुर्वेद एवं सहकारिता मंत्री के रूप में शपथ ली।