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सरकार ने कर्मचारियों को दिए कई तोहफे, डीए-भत्ते देने को मंजूरी

Fri, 30 Dec 2016 04:58 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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वीरभद्र सरकार ने नए साल से पहले ही लाखों कर्मचारियों को कई तोहफे दे दिए हैं। सरकार ने डीए, भत्तों आदि की मांगों को मान लिया है। आइए जानते हैं सीएम की अध्यक्षता में हुई जेसीसी की बैठक में क्या क्या फैसले लिए गए-
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राज्य सरकार ने सरकारी कर्मचारियों को कर्मचारियों को पहली जुलाई 2016 से देय महंगाई भत्ता देने की घोषणा कर दी है। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने वीरवार को राज्य सचिवालय में हुई संयुक्त समन्वय समिति की बैठक में इसका ऐलान किया। साथ ही कहा कि कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाने और कर्मचारियों को 4-9-14 का लाभ देने का मामला कैबिनेट में ले जाया जाएगा। वहीं, सीएम ने कहा कि कर्मचारी प्रदेश की रीढ़ हैं और उनके प्रति सरकार हमेशा सकारात्मक रवैया रखती है।
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मीटिंग के पहले सत्र में शिरकत करते हुए सीएम ने कर्मचारियों का राजधानी भत्ता और जनजातीय भत्ता बढ़ाने की भी घोषणा की। इसके बाद बैठक के दौरान अतिरिक्त मुख्य सचिव अतिरिक्त मुख्य सचिव कार्मिक तरुण श्रीधर और अतिरिक्त मुख्य सचिव वित्त डा श्रीकांत बाल्दी की एक कमेटी गठित करने का भी निर्णय लिया गया।

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फारका ने सभी विभागों को पदोन्नति के मामलों का शीघ्र निपटारा करने के निर्देश दिए ताकि कर्मचारी को समय पर लाभ मिल सके। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि भर्ती एवं पदोन्नति नियम को विभाग की संबंधित एसोसियेशन के साथ विचार विमर्श कर तैयार किया जाए। उन्होंने विभागीय कार्यवाही तथा विभागीय जांच के लंबित मामलों का प्राथमिकता के आधार पर निपटारा करने के निर्देश दिए। उन्होंने इन सभी मामलों में रिपोर्ट हर महीने सरकार को प्रस्तुत करने को कहा।
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शिमला के एसडीए परिसर में सार्वजनिक शौचालयों के निर्माण की मांग पर मुख्य सचिव ने कहा कि मामला नगर निगम शिमला से उठाया जाएगा। कर्मचारियों के लिए आवासीय क्वाटरों के निर्माण की मांग पर उन्होंने कहा कि सरकार कर्मचारियों को आवासीय सुविधा प्रदान करने तथा मौजूदा आवासों की मुरम्मत की दिशा में ठोस प्रयास कर रही है। उन्होंने इस संबंध में मामला विशेष प्रस्तुत करने को कहा तथा आश्वासन दिया कि इसके लिए उचित धनराशि उपलब्ध करवाई जाएगी।
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प्रमोशन के जरिये भरे जाने वाले नए सृजित पदों और रिक्त पदों को लेकर भी मुख्य सचिव ने कड़ा संज्ञान लिया। सभी विभागों को कहा कि वह पद भरने के लिए जल्द से जल्द डीपीआर करें। इसके अलावा कहा कि अगर रिक्त पद भरने के लिए निचले कर्मचारी अर्हता न पूरी करते हो तो ऐसे मामलों को कार्मिक विभाग को भेजा जाए। जरूरत के हिसाब से कार्मिक विभाग नियमों में छूट प्रदान कर देगा।
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शिक्षा विभाग में अधीक्षक वर्ग एक के 117 पदों की बहाली तथा उच्च शिक्षा व प्रारंभिक शिक्षा विभागों में संयुक्त मिनिस्ट्रीयल कैडर के मुद्दे पर मुख्य सचिव ने विभाग को ठोस प्रस्ताव भेजने को कहा। वहीं, स्वास्थ्य विभाग में कर्मचारी चयन आयोग हमीरपुर द्वारा रोगी कल्याण समिति के माध्यम से नियुक्त कर्मचारियों को पांच साल में नियमित करने पर भी फैसला हुआ। हनीश ठाकुर ने बताया कि नियमितीकरण में रोगी कल्याण समिति का कार्यकाल भी जोड़ा जाएगा।

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मुख्य सचिव ने कहा कि कर्मचारियों की मांगों के निपटारे के लिए अतिरिक्त मुख्य सचिव डा श्रीकांत बाल्दी की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित की जाएगी। कमेटी में अतिरिक्त मुख्य सचिव तरुण श्रीधर भी होंगे। यह कमेटी 2006 में स्केल रिवाइज होने के बाद से भत्तों को लेकर आई विसंगतियों को देखेगी। साथ ही उन तीस श्रेणियों के मामले भी देखेगी जिनका पंजाब में नामेनक्लेचर नहीं है जबकि हिमाचल में उस कैटेगरी में कर्मचारी कार्यरत है लेकिन उन्हें ग्रेड पे नहीं मिल रहा। इसके अलावा विभागों से आने वाले रिक्रूटमेंट एंड प्रमोशन रूल्स में बदलाव और भर्ती के प्रस्तावों पर भी कमेटी फैसले लेगी।

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मुख्य सचिव ने बैठक में एजेंडा पर चर्चा करते हुए विशेषकर ग्रेड पे में विसंगति के मामलों को संबंधित विभागीय सचिवों के माध्यम से भेजने को कहा। उन्होंने कहा कि इसकी उपयुक्त जांच कर समाधान किया जाएगा। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की पदोन्नति में 10 जमा दो की शैक्षणिक योग्यता में छूट तथा इस श्रेणी से लिपिक के पद भरने में एक मुश्त छूट के मुद्दे पर उन्होंने सहानुभूति पूर्वक विचार कर शीघ्र ही निर्णय की बात कही। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने चार वर्षों के दौरान विभिन्न विभागों में हजारों पदों पर भर्तियां की हैं और यदि कोई अति आवश्यकता के क्रियाशील पद रिक्त हैं तो उनका प्रस्ताव सरकार को भेजा जाए।

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सचिवालय में वीरवार को हुई बैठक में मुख्य सचिव ने सभी विभागाध्यक्षों को निर्देश दिए हैं कि वह हर तिमाही में कर्मचारी संगठनों के साथ बैठक करें। इन बैठकों में कर्मचारियों की मांगों पर चर्चा कर अपने स्तर से ही निपटारा किया जाए। साथ ही इन बैठकों की विस्तृत जानकारी कार्मिक विभाग को भी भेजेंगे। मुख्य सचिव वीसी फारका ने यह भी कहा कि अगर किसी मुद्दे पर जरूरत पड़ती है तो विभागाध्यक्ष कार्मिक या वित्त विभाग से भी सहयोग ले सकते हैं। कहा कि ऐसा होने से कर्मचारियों से जुड़े बड़े मुद्दे ही जेसीसी में आएंगे जिससे उनपर चर्चा के बाद निर्णय करने में आसानी होगी।

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जेसीसी में कर्मचारियों की कुछ मांगों को मानने से इनकार कर दिया है। कर्मचारियों की मांग थी कि नौकरी ज्वाइन करने वाले कर्मचारियों को ज्वाइनिंग डेट से इनीशियल पे दी जाए। इसके लिए दो साल इंतजार करने के प्रावधान को खत्म किया जाए। इस पर मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि पंजाब वेतन आयोग जो भी सिफारिश करेगा उसे माना जाएगा। लेकिन पंजाब कैबिनेट के फैसले मानने को हिमाचल बाध्य नहीं है। न्यू पेंशन स्कीम को बंद कर पुरानी स्कीम लागू करने की मांग को भी सरकार ने खारिज कर दिया।

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बैठक के दौरान एक मांग को लेकर मुख्य सचिव व एसीएस कार्मिक कर्मचारियों को समझाने का प्रयास कर रहे थे लेकिन कर्मचारी अपनी बात कहने पर अड़ गए। एक साथ कई कर्मचारी बोलने का प्रयास करने लगे तो वरिष्ठ अधिकारी ने तल्ख लहजे में कहा कि यह जेसीसी की बैठक है, इसे पब्लिक मीटिंग न समझे। अधिकारी के सख्त लहजे का असर यह हुआ कि इसके बाद कर्मचारी ज्यादा बोलने की हिम्मत भी नहीं जुटा सके।
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अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ की जेसीसी में सरकार द्वारा दो प्रतिशत महंगाई भत्ता देने के ऐलान पर कर्मचारी परिसंघ ने विफल बताया है। परिसंघ के नेताओं का कहना है प्रदेश के कर्मियों को केन्द्र के आधार पर मिलने वाला महंगाई भत्ता पूर्व संशोधित वेतनमानों पर आधारित 7 प्रतिशत देय बनता है। चूंकि केन्द्र सरकार द्वारा 2 प्रतिशत महंगाई भत्ता जुलाई 2017 से संशोधित वेतनमानों पर आधारित है और। ऐसे में यदि हिमाचल प्रदेश सरकार पूर्व संशोधित वेतनमानों पर 2 प्रतिशत का भुगतान करती है तो यह केन्द्र पर आधारित मिलने वाले महंगाई भत्ते के फार्मूले में अंतर पैदा करेगी जिससे कर्मचारियों का ही नुकसान होगा।
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