सिराज की युवा लोक गायिका गीता भारद्वाज हिमाचल की किसी भी बोली में गा सकती हैं। चाहे मंडी की सिराजी बोली, मंडयाली, शिमला की अप्पर महासुवीं बोली हो, कांगड़ी हो या फिर चंबयाली हो या फिर किन्नौरी या लाहौली बोलियां। वह कहती हैं कि उन्हें हिमाचल की हर कोने की लोक गायकी अच्छी लगती है।