यदि आप भी तेज साउंड में डीजे सुनने के शौकीन हैं तो जरा सावधान हो जाएं। लगातार बजने वाला डीजे आपको और आपके लाडले को 10 गंभीर बीमारियां दे सकता है। डीजे की तीव्र ध्वनि कई खतरनाक बीमारियां दे सकती है। आइए जानते हैं-
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एक स्वस्थ्य व्यक्ति के लिए 50 डेसीबल तक की ध्वनि सहन करने लायक होती है, लेकिन डीजे की ध्वनि की तीव्रता करीब 500 डेसीबल तक पहुंच जाती है। ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. केआर आर्य की मानें तो तीव्र ध्वनि की वजह से प्रजनन क्षमता घट जाती है।
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डीजे की ज्यादा साउंड मस्तिष्क में तनाव पैदा करती है। इससे चिड़चिड़ापन बढ़ता है।
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रक्तचाप बढ़ जाता है। खून में शर्करा बढ़ने लगती है।
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हृदय की धड़कन तेज हो जाती है।
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तेज साउंड के कारण कार्यक्षमता घटती है और एकाग्रता नष्ट हो जाती है।
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गर्भपात की शिकायत बढ़ती है तथा मानसिक रूप से विकलांग बच्चे पैदा हो सकते हैं।
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आज की युवा पीढ़ी में बौनापन का एक कारण डीजे भी हो सकता है।
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आंखों में जल्द चश्मा तथा एकाग्रता की कमी इसकी प्रमुख वजह है।
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ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. केआर आर्य की मानें तो ऊंची ध्वनि मस्तिष्क में तनाव पैदा करती है, चिड़चिड़ापन बढ़ता है, रक्तचाप बढ़ जाता है। खून में शर्करा बढ़ने लगती है, हृदय की धड़कन तेज हो जाती है, कार्यक्षमता घटती है और एकाग्रता नष्ट हो जाती है। तीव्र ध्वनि की वजह से प्रजनन क्षमता घट जाती है, गर्भपात की शिकायत बढ़ती है तथा मानसिक रूप से विकलांग बच्चे पैदा हो सकते हैं। आज की युवा पीढ़ी में बौनापन, आंखों में जल्द चश्मा तथा एकाग्रता की कमी इसकी प्रमुख वजह है।
पर्यावरण प्रदूषण के चिंतक प्रो. एचएस चट्ठा की मानें तो हमारे घर में दिन के समय अधिकतम 25 से 30 तथा रात्रि में 20 से 25 डेसीबल तक ध्वनि होनी चाहिए। लेकिन, वाहनों के प्रेशर हॉर्न तथा मशीनों की आवाज से भी ध्वनि प्रदूषण की तीव्रता बढ़ जाती है। ऐसे में डीजे की तीव्र ध्वनि के पास खड़े रहना सेहत के लिए भयानक खतरा पैदा करता है।