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नोटबंदी में एक और झटका, स्वैप मशीनें भी बनीं मुसीबत, जानें कैसे?

Tue, 13 Dec 2016 09:34 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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नोटबंदी अब कारोबारियों को डराने लगी है। पीएम की अपील पर कारोबारी स्वैप मशीनें तो लगाना चाह रहे हैं लेकिन इसमें भी बड़ी परेशानी आ रही है। आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला-
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नोटबंदी का असर अब कारोबार पर भी दिखने लगा है। महज एक माह में ही कारोबार 60 फीसदी तक गिर गया है। नोटबंदी से छोटे कारोबारियों का कारोबार तो चौपट ही हो गया है। इन कारोबारियों का दावा है कि कारोबार में साठ फीसदी तक गिरावट आ गई है। इनका कारोबार नकदी से चलता है।
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पीएम मोदी की अपील पर छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े कारोबारियों ने स्वैप मशीनें लगाने की तैयारी तो कर ली लेकिन अब इसमें भी नई परेशानी सामने आ रही है। मजबूरन करीब एक माह तक ये मशीनें कारोबारियों को नहीं मिल सकेंगी।

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नोटबंदी के बाद कारोबारियों ने स्वैप मशीनें लगाने के लिए बैंक में आवेदन भी किया है लेकिन इस प्रक्रिया में भी अभी कम से कम एक महीना और लगेगा। नए साल में हीं ये मशीनें कारोबारियों के पास उपलब्‍ध होंगी। बैंक इसकी देरी के पीछे बड़ा कारण दे रहे हैं।
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बैंकों का कहना है कि नोटबंदी के बाद एकाएक इन मशीनों की डिमांड बढ़ गई हैं। वहीं, नोटबंदी के बीच बैंकों में पहले ही काम बढ़ गया है। कई जगहों पर ये मशीनें खत्म भी हो गई हैं और इनकी सप्लाई मंगवाई जा रही है। वहीं, जहां पर ये मशीनें उपलब्‍ध हैं वहां इन्हें उपलब्‍ध करवाने के लिए एक से डेढ़ महीने तक का समय दिया जा रहा है।
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यानि अगले 30-40 दिन तक ये मशीनें उपलब्‍ध नहीं हो पाएंगी। कारोबारियों के साथ साथ आम जनता को अगले कई दिन ऐसे ही परेशानी में झेलने पड़ेंगे। शिमला में पहले ये मशीनें आवेदन करने के सिर्फ 10 दिन के भीतर उपलब्‍ध हो जाती थीं, लेकिन अब डिमांड बढ़ने से ये महीने बाद उपलब्‍ध हो पा रही हैं।
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दुकानों में स्वैप मशीन नहीं लग रही हैं। कारोबारियों का कहना है कि हर कोई दो हजार का नोट लेकर आ रहा है। उनके पास छुट्टे का अभाव रहता है। ऐसे में कारोबार चौपट होने लगा है। सौ और पांच सौ रुपये के नोट कम होने से लोगों के पास दो हजार के नोट का ही विकल्प बचा है। ऐसे में छोटे कारोबारी क्या करें।

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व्यापार में इतनी गिरावट आ गई है कि इस सर्दियों में बेचने के लिए मंगवाया गया माल सारा स्टोर कर अगले साल के लिए रखना पड़ेगा।

 

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अकेले शिमला व्यापार मंडल में करीब चार हजार कारोबारी पंजीकृत हैं। इनमें से ज्यादातर छोटे कारोबारी हैं। इनका कारोबार नकदी में ही चलता है। छोटे दुकानदारों का कहना है कि नोटबंदी की सबसे बड़ी मार उनके कारोबार पर पड़ी है। सिर्फ दो हजार के नोट आ रहे हैं।  व्यापारियों ने सर्दियों का माल नवंबर से पहले ही मंगवा दिया था लेकिन बिक कुछ भी नहीं रहा है। ग्राहक को छुट्टे कहां से दें, 100 और 150 का सामान लेने पर ग्राहक 2000 रुपये थमा रहे हैं।

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लोअर बाजार के कॉस्मेटिक और प्लास्टिक गुड्स के दुकान मालिक राज कुमार शर्मा ने बताया कि नोटबंदी से व्यापार पूरी तरह चौपट होने लगा है। दोपहर के बारह बज गए हैं लेकिन अभी तक दुकान में एक ग्राहक नहीं आया है। नोटबंदी के कारण उनका व्यापार काफी गिर गया है। चिंता हो रही है कि परिवार का खर्च कैसा चलेगा।

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शिमला लोअर बाजार के कपड़ा व्यापारी विद्या भवन सच्ची दुकान के मालिक ने कहा कि नोटबंदी के बाद से व्यापार की स्थिति खराब हो गई है। लोगों के पास पैसा कम होने के कारण जरूरत की ही चीजें खरीद रहे हैं। उन्होंने कहा कि दुकान से कपड़े की बिक्री नहीं होने के कारण मजबूरन चारपाई लगाकर सस्ते दामों में कपड़े बेचने पड़ रहे हैं।
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व्यापार मंडल के अध्यक्ष इंद्रजीत सिंह ने कहा कि यह फैसला राष्ट्रहित में लिया गया है। व्यापारी सरकार के साथ एकजुट खड़ा है। सरकार को चलाने में व्यापारियों का ही सबसे बड़ा हाथ होता है। वही सरकार को सबसे अधिक टैक्स देते हैं। इस फैसले में भी व्यापारी सब साथ खड़े हैं। शिमला में बड़े कारोबारियों के कारोबार में 20 फीसदी तक फर्क पड़ा है छोटे कारोबारी ज्यादा प्रभावित हैं। शहर के बैंक भी व्यापारियों की हर संभव मदद कर रहे हैं।
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