आतंकवादियों की घुसपैठ नाकाम करने में सर्वोच्च बलिदान देने वाले गोरखा रेजिमेंट के तारा बहादुर की मां फूट-फूट कर रोई। मेरे बेटे को तब तक इंसाफ नहीं मिलेगा जब तक भारत सरकार इसका बदला नहीं लेगी। यह बात जम्मू-कश्मीर के नौगाम सेक्टर में आतंकवादियों की घुसपैठ को रोकते हुए शहीद हुए जवान की मां ने कही।
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रूंधे गले से तारा बहादुर रोका की मां ने कहा कि कब तक देश के लिए जवान शहीद होते रहेंगे और भारत सरकार संयम बरते बैठी रहेगी। शहीद जवान की मां कमला रोका ने बताया कि नेपाल में उन्हें पता लगा कि उनका बेटा शहीद हो गया है।
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एक ओर जवान सरहद पर गोली खाकर देश की रक्षा में डटे हैं दूसरी ओर क्रिकेट जैसे खेल उसी देश के साथ हो रहे हैं।
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उन्होंने कहा कि फुटबाल विश्व भर में लोकप्रिय खेल है, लेकिन उसमें भी दुश्मन देश के साथ खेलने से कई बार टीम या खिलाड़ी ही इनकार कर देते हैं।
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उन्होंने भारत सरकार से आह्वान किया कि पाकिस्तान के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। अन्यथा शहीदों के शव शरहद से ऐसे ही आते रहेंगे।
शहीद की मां कमला रोका ने बताया कि उनका बेटा 24 साल का था और घर में सभी उसे छुट्टी पर मिलने का इंतजार कर रहे थे। छुट्टी मिलते ही उसकी शादी करने वाले थे। इसके लिए एक लड़की भी देख रखी थी, लेकिन यह सपना कभी भी पूरा नहीं होगा।