कुपवाड़ा के नौगाम सेक्टर में आतंकवादियों की घुसपैठ नाकाम करने में सर्वोच्च बलिदान देने वाले गोरखा रेजिमेंट के तारा बहादुर रोका का सैनिक सम्मान के साथ सुबाथू में अंतिम संस्कार किया गया। करीब दोपहर 12 बजे शहीद का पार्थिव शरीर सुबाथू लाया गया। जिसके बाद समूचे क्षेत्र का माहौल गमगीन हो गया।
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युवा वर्ग ने जमकर पाकिस्तान मुर्दाबाद और आतंकवाद का सफाया करो के नारे लगाए। सुबाथू में शहीद को आखिरी विदाई देने के लिए जनसैलाब उमड़ पड़ा। नेपाल से आए शहीद के परिजनों को आखिरी दर्शनों के लिए शव को कुछ देर तक रखा गया।
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इस दौरान परिजन शव से लिपट कर रोते बिलखते रहे। वहीं सेना के जवान नम आंखों से अपने साथी की बहादुरी को सलाम करते नजर आए। तिरंगे में लिपटे भारत के इस वीर के पार्थिव शरीर के साथ जब उसकी माता व भाई लिपट कर विलाप कर रहे थे। तो इस नजारे को देख हर आंख नम थी।
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सेना के धर्म गुरू ने परिजनों के हाथों शहीद तारा बहादुर का अंतिम संस्कार करवाया। शहीद की अंतिम यात्रा के दौरान सैनिकों ने सेना बैंड की देशभक्ति धुन के साथ शहीद के पार्थिक शरीर को अंतिम घाट तक पहुंचाया।
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यहां शहीद के छोटे भाई शरद रोका ने अपने बड़े भाई मुखाग्नि दी। इस दौरान सुबाथू व नजदीक क्षेत्रों से आए लोगों ने भारत माता की जय, शहीद तारा बहादुर अमर रहे के नारे भी लगाए।
इस मौके पर 14 जीटीसी के कमांडेंड आर.एस. रावत, डीसी सोलन राकेश कवर सहित रेजिमेंट के अन्य सेना अधिकारियों ने शहीद को पुष्प अर्पित करते हुए श्रद्घाजंली दी।