सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 1992 से 2013 तक इजरायल, इटली, यूके, जर्मनी और फ्रांस के 21 लोगों की इस 'डेथ वैली' में मौत हो चुकी है जबकि 18 लोग लापता हैं जिनका आज तक कुछ पता नहीं चल पाया। द गार्डियन और और द यरूशलम पोस्ट ने इस घाटी को डेथ वैली का नाम दिया है। जानिए क्या है मौतें और लापता होने का रहस्य? इनपुट: अरविंद ठाकुर, रितेश गुलेरिया
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'मौत की घाटी' में 18 के बाद लापता हुआ एक और विदेशी टूरिस्ट
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हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल मणिकर्ण की पार्वती घाटी से एक विदेशी ट्रैकर लापता हो गया है। पोलैंड निवासी ब्रूनो मुस्चालिक घाटी की ट्रैकिंग पर निकला था। पुलिस के अनुसार बुरैनो 8 अगस्त को मनाली से मणिकर्ण के लिए चला और अंतिम बार इसे बरशैणी में देखा गया। ब्रूनो के फेसबुक पेज पर भी लापता होने की सूचना पोस्ट की गई है।
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'मौत की घाटी' में 18 के बाद लापता हुआ एक और विदेशी टूरिस्ट
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8 अगस्त के बाद ब्रूनो का कोई अता पता नहीं चला है। बुरैनो ने फेसबुक पर मनाली भ्रमण का जिक्र किया है और वहां से मणिकर्ण घाटी जाने की बात भी लिखी है।
'मौत की घाटी' में 18 के बाद लापता हुआ एक और विदेशी टूरिस्ट
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ब्रूनो के लापता होने की सूचना दिल्ली स्थित विदेशी दूतावास को मिली। सूचना मिलते ही दिल्ली से एक दल मणिकर्ण पहुंच गया है। डीएसपी संजय शर्मा ने पुष्टि की कि उन्हें विदेशी दूतावास से मणिकर्ण में विदेशी के लापता होने की सूचना मिली है।
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ब्रूनो के फेसबुक पेज पर लापता होने का पोस्ट।
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पुलिस ने लापता ट्रैकर ब्रूनो को ढूंढने के लिए सर्च अभियान शुरू कर दिया है।
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डीएसपी ने बताया कि ब्रूनो की तलाश के लिए स्थानीय ट्रैकरों और गाइड की मदद भी ले रही है। पुलिस ने मामला दर्ज कर छानबीन तेज कर दी है। आगे जानिए क्या है लापता होने का रहस्य
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कुल्लू घाटी आसानी से मिलने वाले नशे के लिए भी बदनाम रही है। कई हाई प्रोफाइल मामलों में हेलीकॉप्टर की मदद से सर्च ऑपरेशन चलाए, लेकिन आज तक लापता युवाओं का सुराग नहीं मिला। विदेशी टूरिस्ट भांग और अन्य नशे कर ट्रैकिंग पर निकलते हैं और बीच में रास्ता भटक जाते हैं।
'मौत की घाटी' में 18 के बाद लापता हुआ एक और विदेशी टूरिस्ट
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सरकारी आंकड़ों के मुताबिक कुल्लू की पार्वती घाटी में 1992 से 2013 तक इजरायल, इटली, यूके, जर्मनी और फ्रांस के 21 लोगों की मौत हो चुकी है जबकि 18 लोग लापता हैं जिनका आज तक कुछ पता नहीं चल पाया। 2015 तक लापता का यह आंकड़ा दो दर्जन के करीब हो सकता है। द गार्डियन और और द यरूशलम पोस्ट ने इस घाटी को डेथ वैली का नाम दिया है।
'मौत की घाटी' में 18 के बाद लापता हुआ एक और विदेशी टूरिस्ट
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27 नवंबर 2005 को इजरायल के डेनियल माउंटबिटन भी इस घाटी में गायब हुए थे। आज तक इनका भी कुछ पता नहीं चल पाया।
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27 अक्टूबर 2014 को भी इस घाटी में गुजरात का एक टूरिस्ट मनीष लापता हो गया था। करीब एक माह बाद घाटी के साथ लगते नाले में उसका शव मिला था।
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23 अगस्त 2013 को फ्रांस के दो ट्रैकर सबीर (20) और वेलिंगटन (21) इसी घाटी से गायब हो गए थे जिनका आज तक कुछ पता नहीं चल पाया।
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7 दिसंबर 2003 को ब्रिटेन के अन्ना बार्टलेट इसी घाटी से गायब हो गए थे। करीब दो हफ्ते बाद उनका शव मिला था।
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पार्वती घाटी में ट्रैकिंग के लिए पहुंचे विदेशी टूरिस्ट। (फाइल फोटो)
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विदेशी टूरिस्ट इस तरह टेंट लगाकर यहां रात को रूकते हैं। (फाइल फोटो)
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