क्या आप जानते हैं कि आज के करोड़पति खली को पहली नौकरी में कितनी सैलरी मिली थी। पहली कमाई पाकर खली खुशी से उछल पड़े थे। कहानी ऐसी है कि आप खली को सलाम करेंगे। आइए जानते हैं पूरी कहानी-
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नौकरी से संबंधित यह खुलासा खली ने अपनी आत्मकथा ‘द मैन हू बिकम खली’ में किया है। खली बचपन में ज्यादा पढ़ाई नहीं कर पाए। इसका कारण ये नहीं कि वे पढ़ना नहीं चाहते थे बल्कि कुछ और ही था।
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खली के परिजन गरीबी के कारण ढाई रुपये की स्कूल फीस का भार उठाने में अक्षम थे। इस कारण उन्हें दूसरी क्लास में ही स्कूल छोड़ना पड़ गया था तथा दिहाड़ी मजदूरी करनी पड़ी थी।
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पढ़ाई के बारे में खली कहते हैं कि घर में फीस देने के लिए पैसे नहीं थे। अभी मुझे दूसरी कक्षा में आए करीब एक ही महीना हुआ था। प्रिंसिपल हर रोज फीस के लिए मुझे ताने मारते थे। एक दिन शिक्षक ने पूरी क्लास के सामने मुझे गालियां दीं।
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सभी मुझ पर हंस रहे थे और मेरा मजाक बना रहे थे। मैंने तभी कभी भी स्कूल नहीं जाने का फैसला कर लिया था। मेरी पढ़ाई उसी दिन हमेशा के लिए बंद हो गई थी। मैं अपने घर और परिवार की मदद के लिए काम खोजने लगा था।
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खली आगे लिखते हैं, एक दिन मैं अपने पिता के साथ था। तभी एक आदमी ने गांव में पेड़ लगाने की नौकरी की जानकारी दी। बताया गया कि तनख्वाह भी रोज की रोज मिलेगी। खली ये नौकरी करने को तैयार हो गए।
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खली को बताया गया कि इस काम में हर रोज पांच रुपये मिलेंगे। यह सुनते ही खली की आंखें आश्चर्य में फैल गईं थीं। खली के अनुसार, मेरे लिए पांच रुपया बहुत बड़ी रकम था। मैं सोचने लगा था कि अभी हमारे पास फीस के ढाई रुपये भी नहीं थे। पांच रुपये इसकी तुलना में जैकपॉट था।
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खली काम करने को तैयार हो गए। जब पहले दिन के काम के बाद पांच रुपये का नोट मिला, तो खली खुशी से उछल पड़े। अपनी पहली कमाई पाकर वह सातवें आसमान पर थे। इस हिसाब से उन्हें अपनी इस नौकरी से प्रतिमाह 150 रुपए मिलने वाले थे।
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हालांकि अंगरक्षक के तौर पर खली की नौकरी शिमला में लगी लेकिन खली अपनी नौकरी और अपनी पहली कमाई पौधे लगाने के काम को ही मानते हैं। यही उनके जीवन का संघर्ष था। मेहनत के बूते गांव का एक लड़का महाबली बन गया।
आज अगर दुनिया खली को जानती है तो उनकी ताकत और विशालकाय शरीर के लिए। मगर खली ने अपना बचपन जिस संघर्ष में गुजारा और सफलता हासिल की, उसकी कहानी युवाओं को आगे बढ़ने की प्रेरणा देने के लिए काफी है। हिमाचल के लोग खली को उनके संघर्ष के लिए हमेशा ही सलाम करते हैं।