राजधानी में मूसलाधार बारिश ने खूब तबाही मचाई। भूस्खलन होने, डंगे ढहने और पेड़ गिरने से शहर के 50 से ज्यादा भवनों को खतरा पैदा हो गया है। यह कभी भी ढह सकते हैं। पेड़ और मलबा गिरने से करीब एक दर्जन मकान क्षतिग्रस्त हो गए हैं।
विज्ञापन
2 of 8
शहर में 30 गाड़ियां पूरी तरह से चकनाचूर हो गई हैं। दो दर्जन से अधिक वाहनों को हल्का नुकसान हुआ है। ऐतिहासिक रिज मैदान पर गेयटी थिएटर के सामने दरारें और बढ़ गई हैं। रिज का यह हिस्सा कभी भी धंस सकता है।
विज्ञापन
3 of 8
उधर अपर ढली की हिमगिरी कालोनी में आठ बहुमंजिला भवनों पर खतरा मंडरा गया है। कृष्णानगर इलाके में भी नाले से सटे 20 से अधिक मकानों को खाली करने को कहा है।
4 of 8
बाकी वार्डों में भी पहाड़ी पर बने मकान भूस्खलन से गिरने की कगार पर पहुंच गए हैं। सुबह के समय हुई मूसलाधार बारिश से पूरे शहर में तबाही का ऐसा मंजर रहा कि निगम परिधि के भीतर ही देवदार के 78 पेड़ धराशायी हो गए।
विज्ञापन
5 of 8
पेड़ और मलबा गिरने से 20 से अधिक एंबुलेंस रोड भी बंद हो गए हैं। निगम का दावा है कि शहर में चार करोड़ का नुकसान हुआ है। अब तक कुल आठ करोड़ का नुकसान शहर में हो चुका है। करोड़ों की निजी संपत्ति भी तबाह हो गई है।
विज्ञापन
6 of 8
शहर में विभिन्न जगहों पर 78 पेड़ गिर गए हैं। अकेले मेयर कुसुम सदरेट के वार्ड के गवाही गांव में 20 से ज्यादा पेड़ धराशायी हो गए। शिमला शहरी क्षेत्र में 62 और ग्रामीण क्षेत्र में 16 पेड़ गिरे हैं।
विज्ञापन
7 of 8
वन विभाग इन्हें सड़कों से हटाने के प्रयास कर रहा है। करीब दो दर्जन पेड़ घरों पर खतरा बनकर झूल रहे हैं। यह कभी भी गिर सकते हैं।
उधर, डीएफओ ग्रामीण अमित शर्मा ने कहा कि बरसात में इससे पहले कभी ऐसी तबाही नहीं देखी। कहा कि हर साल दस से 15 पेड़ बरसात में गिरते थे। लेकिन इस बार एक ही दिन में दर्जनों पेड़ ढह गए।