फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

डॉक्टर की सलाह: इन कारणों से डिप्रेशन का शिकार हो रहे लोग, ऐसे पाएं निजात

Tue, 26 Mar 2019 05:00 AM IST
Krishan Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हमीरपुर
विज्ञापन
1 of 9
डेमो
अवसाद के मामले लगातार बढ़ रहे हैं जोकि समाज के लिए चिंता का विषय है। वर्तमान रहन-सहन, नशे के बढ़ते प्रभाव, मोबाइल के अधिक प्रयोग और पारिवारिक समस्याओं के चलते लोग अवसाद यानी डिप्रेशन का अधिक शिकार हो रहे हैं। 
Trending Videos
विज्ञापन

2 of 9
अवसाद के शिकार हुए लोग अपनी जीवन लीला तक समाप्त कर लेते हैं। ऐसे में यह समाज के लिए चिंतनीय विषय है। डिप्रेशन के लक्षण शुरूआत में ही पता चलने पर इसका काउंसलिंग से भी इलाज किया जा सकता है, लेकिन यदि लक्षणों के बाद देर हो जाए तो मरीज की स्थिति के हिसाब से उपचार होता है।
विज्ञापन

3 of 9
अमूमन साढ़े चार से छह माह का पहला दवाई कोर्स चलता है। अगर लक्षण होने के बावजूद मरीज या उसके परिजन तुरंत चिकित्सक को नहीं दिखाते हैं तो इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।

4 of 9
- फोटो : social media
डिप्रेशन के मुख्य कारण पारिवारिक समस्याएं या जिम्मेदारी बढ़ने, नशे की लत, मौसम में बदलाव, परीक्षाएं, मोबाइल फोन और अकेलापन आदि प्रमुख हैं। इससे मुख्यतया 20 से 40 साल तक और 60 से अधिक वर्ष वाले लोग ग्रस्त होते हैं।
विज्ञापन

5 of 9
डॉ. संदीप कुमार - फोटो : अमर उजाला
किसी भी प्रकार के तनाव को करीबियों से साझा कर भी डिप्रेशन से बचा जा सकता है। अगर तनाव या अपनी समस्या को मन में ही रखेंगे तो फिर अवसाद का शिकार होंगे। अवसाद में मनुष्य आत्महत्या तक करता है। डॉ. राधा कृष्णन मेडिकल कॉलेज हमीरपुर के मनोरोग चिकित्सक डॉ. संदीप कुमार ने कहा कि डिप्रेशन वर्तमान में घातक बीमारी बनता जा रहा है। उन्होंने लक्षण पाए जाने पर तुरंत चिकित्सक को दिखाने की अपील की है।
विज्ञापन

6 of 9
अवसाद के लक्षण 
चिड़चिड़ापन, अकेले और चुप रहना, नींद न आना या बहुत आना, घबराहट, बेचैनी, विश्वास में कमी आना, खुशी तथा गम का एहसास न होना, नकारात्मक सोच, गुस्सा, ध्यान केंद्रित न हो पाना आदि। 
विज्ञापन

7 of 9
ऐसे करें बचाव 
लक्षण होने पर तुरंत चिकित्सक को दिखाएं। नशे से दूर रहें, रोजाना व्यायाम करें, ध्यान लगाएं, मोबाइल का कम प्रयोग करें, मनोरंजक गतिविधियां करें, समाज में सहभागिता बढ़ाएं और लोगों से घुले मिलें। 

8 of 9
डॉ. राजिंद्र पाल
आयुर्वेदिक नुसखा
जिला आयुर्वेदिक अस्पताल हमीरपुर के सीनियर आयुर्वेदिक ऑफिसर डॉ. राजिंद्र पाल ने कहा कि आयुर्वेद में मरीज की प्रकृति के अनुसार इलाज निहित है। आयुर्वेद में तीन प्रकार से अवसाद का इलाज किया जाता है। 
विज्ञापन

9 of 9
 इसमें सबसे पहले औषधी इलाज के तहत ब्राह्मी, जटामानसी, सारस्वतारिष्ट आदि, पंचकर्म इलाज में मेद्य रसायन औषधि से सिरोधारा, सिरोबस्ती, सिरोपिच्चू, तृतीय इलाज योग में शीतली प्राणायाम, अनुलोम विलोम, कपालभाती, सूर्य नमस्कार आदि शामिल हैं। डॉ. पाल ने कहा कि यह इलाज मरीज की प्रकृति के अनुसार होते हैं। आयुर्वेदिक चिकित्सक से सलाह अनुसार ही आयुर्वेदिक उपचार अपनाएं। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें