तिब्बत से 1959 में शरणार्थी के रूप में आने के बाद भारत में अपनी लोकतांत्रिक सरकार स्थापित करने का अजूबा पेश करने वाले तिब्बतियों के सर्वोच्च धर्मगुरु दलाईलामा के बारे में एक चौंकाने वाली बात सामने आई है।
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पूर्व पीएम ने बताई दलाईलामा से जुड़ी ये चौंकाने वाली बात
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ये बात और किसी ने नहीं बल्कि निर्वासित तिब्बत सरकार के पूर्व प्रधानमंत्री सामदोंग रिंपोंछे ने मानी है।
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इसके
अनुसार दलाईलामा ने आज तक अपनी सरकार के लिए कभी वोट नहीं डाला। माना जाता
है कि दलाईलामा ने ब्रिटेन के राजा की तर्ज पर कभी वोट नहीं डाला।
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तिब्बत
के राजनीतिक जानकार कहते हैं कि मई 2011 को अपनी राजनीतिक शक्तियां
त्यागने से पहले दलाईलामा तिब्बत और निर्वासित सरकार के मुखिया थे।वह किसी
के अधीन नहीं आते थे। ऐसे में तिब्बत का हरेक नागरिक उनके लिए समान था।
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ऐसे
में वह कैसे किसी एक उम्मीदवार को वोट डाल पाते। तिब्बत सरकार के लिए
मतदान की कुछ अहर्ताएं हैं। मसलन, वोट डालने के लिए वोटर आयकर दाता होने के
साथ चुनाव आयोग की मुहर वाले पहचान पत्र जैसी पास बुक होनी चाहिए। यही दो
दस्तावेज दिखाने के बाद वोट डाला जा सकता है।
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निर्वासित तिब्बत
सरकार के पूर्व प्रधानमंत्री सामदोंग रिंपोंछे की मानें तो धर्मगुरु
दलाईलामा ने कभी भी मतदान नहीं किया। हालांकि 2011 में राजनीतिक शक्तियां
लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित प्रधानमंत्री को सौंपने के बाद दलाईलामा भी
आम नागरिक की तरह हो गए।
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इसके बाद वह निर्वासित सरकार को आयकर भी
देने लगे। इस बार उन्होंने मतदान के लिए पंजीकरण भी करवाया था। इस बीच वे
बंद कमरे में लंबी साधना में चले गए जिससे मतदान नहीं कर पाए। हालांकि,
मार्च 2016 के दूसरे चरण के मतदान में वह भाग ले सकते हैं।