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देखिए, कैसे जनशताब्दी जब्त करने पहुंचे कोर्ट कर्मी

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भारतीय रेलवे के इतिहास में ऐसा शायद पहली बार हुआ। रेलवे की ओर से किसानों को मुआवजा न देने पर कोर्ट ने जनशताब्दी एक्सप्रेस को जब्त करने के निर्देश दिए थे। कोर्ट कर्मचारी वीरवार को इन ऑर्डर को लेकर ट्रेन जब्त करने रेलवे स्टेशन पहुंच गए।
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ये कर्मचारी तड़के सुबह रेलवे स्टेशन पहुंचे और अफसरों को कोर्ट ऑर्डर दिखाए। इससे रेलवे के अफसरों के हाथ पांव फूल गए। यही नहीं, ट्रेन में सफर करने जा रहे लोगों में भी हड़कंप मच गया।
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हालांकि, ऐन मौके पर रेलवे के अधिकारियों ने कोर्ट कर्मचारी (बैलिफ) को किसानों के मुआवजे के ड्राफ्ट के प्रति दिखाकर ट्रेन को जब्त होने से बचा लिया।

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कोर्ट कर्मी ने अदालती आदेशों की प्रतियां रेलवे अधिकारी एसके शर्मा को सौंपी। इस पर उन्होंने हाईकोर्ट के नाम से रेलवे की ओर से जारी डिमांड ड्राफ्ट की प्रतियां थमाईं।
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एसके शर्मा ने बैलिफ वंशी लाल को बताया कि अदालत के आदेश 9 अप्रैल को जारी हुए हैं। इसके बाद सरकारी कार्यालयों में छुट्टियां होने के चलते आदेशों की अनुपालना की दिशा में कार्रवाई नहीं हो पाई।
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इतना ही नहीं अभी तक रेलवे को अदालत के आदेशों की प्रति तक नहीं मिल पाई है जिससे देरी हुई। उन्होंने बताया कि प्रभावितों को देय राशि ड्राफ्ट के माध्यम से अदा की जाएगी। उन्होंने प्रभावित मेला राम, मदन लाल और उनके वकील अरुण सैणी को भी बैंक ड्राफ्ट की फोटो कापियां दिखाईं।
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दोनों पक्षों के संतुष्ट होने पर जनशताब्दी एक्सप्रेस अपने तय समय पर दिल्ली के लिए रवाना हुई। इस दौरान प्रभावित किसान मेला राम और मदन लाल समेत कई स्थानीय लोग भी रेलवे स्टेशन पहुंचे हुए थे।
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बैंक ड्राफ्ट की प्रतियां देख दोनों पक्ष संतुष्ट नजर आए और ट्रेन जब्त करने की प्रक्रिया पूरी अमल में नहीं लाई जा सकी।
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