जाखू मंदिर में मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने फुलझड़ी से रावण के पुतले को आग लगाई। मुख्यमंत्री ने रावण के पुतले को जलाकर बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश दिया। मंदिर में रावण के पुतले की ऊंचाई करीब 40 फीट थी। मंदिर परिसर के दूसरी ओर कारीगरों ने रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले बनाए थे। दशहरे के इस ऐतिहासिक मौके पर मंदिर में भारी संख्या में लोगों की भीड़ उमड़ी रही। लोग सड़कों से पैदल ही मंदिर तक पहुंचे और दर्शन भी किए। इसके बाद रावण के दहन को देखने के लिए मंदिर परिसर में उमड़े रहे।
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मुख्यमंत्री ने रावण दहन के लिए रिमोट का बटन दबाया तो यह सिस्टम फेल हो गए। एक रिमोट फेल होने के बाद दूसरा रिमोट मंगवाया लेकिन वह भी नही चला। इसके बाद जब तीसरा रिमोट भी नही चला तो सीएम तल्ख हो उठे और कहा कि आखिर यह कैसे रिमोट हैं और क्यों नही चल पा रहे हैं। इसके बाद फूलझड़ी से सभी पुतले जलाए गए।
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हरिनगर कीर्तन मंडल ने दशहरे के अंतिम दिन झांकी निकाली। यह झांकी शाम छह बजे के करीब संकटमोचन मंदिर पहुंची। इससे पहले झांकी के दौरान राम व रावण का युद्ध दिखाया गया। इसके बाद शाम छह से साढ़े छह बजे के करीब सचिव संकटमोचन मंदिर न्यास के मंजीत शर्मा ने पुतले को आग लगाई। इसके बाद यहां पर पुतलों को देखने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ी रही। मंदिर में रावण का पुतला 40 फीट, मेघनाद 35 और कुंभकर्ण का पुतला 30 फीट ऊंचा था
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शहर के सबसे लोकप्रिय खेल मैदान समरहिल में सबसे ऊंचा रावण का पुतला बनाया गया था। यहां पर रावण का 55 फीट ऊंचा पुतला बनाया गया था। जिससे देखने के लिए स्थानीय निवासी सहित प्रदेश विवि के बाहरी संख्या में छात्र यहां मौजूद थे। रात सवा छह बजे के करीब रावण का पुतले को आग लगाई। इस दौरान लोगों में बुराई के प्रति अच्छाई का संदेश भी दिया गया।