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कैलाश जाने से पहले यहां विश्राम करते हैं भगवान शिव

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महाशिवरात्रि पर्व पर पाताल लोक में विराजमान भगवान शिव कैलाश को प्रस्थान करते हैं। इस यात्रा के दौरान शिव भगवान इस अति प्राचीन मंदिर में विश्राम करते हैं। जानिए पूरी कहानी..

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कैलाश जाने से पहले यहां विश्राम करते हैं भगवान शिव

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कहते हैं महाशिवरात्रि पर्व पर पाताल लोक में विराजमान भगवान शिव कैलाश को प्रस्थान करते हैं। इस यात्रा के दौरान शिव भगवान चंबा भरमौर स्थित अति प्राचीन चौरासी मंदिर में विश्राम करते हैं।

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कैलाश जाने से पहले यहां विश्राम करते हैं भगवान शिव

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उनके इस विश्राम को साकार रूप देने के लिए हर साल हजारों श्रद्धालु भरमौर के चौरासी मंदिर में जुटते हैं। साल में यह पहला मौका होता है जब रात के चार पहर विशेष पूजा-अर्चना चलती है और लगातार घंटियों का शोर समूचे भरमौर में सुनाई देता है।

कैलाश जाने से पहले यहां विश्राम करते हैं भगवान शिव

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कहते हैं महाशिवरात्रि पर्व पर पाताल लोक में विराजमान भगवान शिव कैलाश को प्रस्थान करते हैं। इस यात्रा के दौरान शिव भगवान चंबा भरमौर स्थित अति प्राचीन चौरासी मंदिर में विश्राम करते हैं।

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कैलाश जाने से पहले यहां विश्राम करते हैं भगवान शिव

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उनके इस विश्राम को साकार रूप देने के लिए हर साल हजारों श्रद्धालु भरमौर के चौरासी मंदिर में जुटते हैं। साल में यह पहला मौका होता है जब रात के चार पहर विशेष पूजा-अर्चना चलती है और लगातार घंटियों का शोर समूचे भरमौर में सुनाई देता है।
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कैलाश जाने से पहले यहां विश्राम करते हैं भगवान शिव

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यह पूजा रात के नौ बजे, बारह बजे, दो बजे व और सुबह चार बजे नियमित अंतराल के बाद की जाती है। ऐसी घटना साल में केवल एक ही बार आती है। इसके अलावा मणिमहेश मंदिर व धर्म राज मंदिर में मौजूद लिंग को विशेष स्नान दिया जाता है।
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कैलाश जाने से पहले यहां विश्राम करते हैं भगवान शिव

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स्नान में गंगाजल, दूध, दही, शहद, घी, फूल, धतूरे का प्रयोग करके सूखे मेवे का प्रसाद बांटा जाता है। इस पल की आस में काफी श्रद्धालु मणिमहेश मंदिर के बाहर सारी रात जागरण करते हैं । मंदिर के बाहर शिव नवाले का आयोजन किया जाता है।

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शिवरात्रि के दिन चौरासी मंदिरों को विशेष फूलों से सजाया जाता है तथा चार पहर पूजा की जाती है। महाशिवरात्रि की रात को जो भगत जागरण करते हैं उन लोगों के लिए मृत्यु के बाद शिव लोक के द्वार हमेशा खुले रहते हैं।

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