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बर्फीले रेगिस्तान में मिला बच्चे का कंकाल, खुले चौंकाने वाले राज

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हिमाचल के लाहौल स्पीति में मिले 3000 साल पुराने बच्चे के कंकाल से चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। इस कंकाल को देखने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ रही है।
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इस कंकाल को शिमला के गेयटी थिएटर में लगी प्रदर्शनी में लगाया गया है। अब तक की जांच में इस कंकाल से कई राज सामने आए हैं। यह कंकाल तीन हजार साल पुराना है। बच्चे की लंबाई उस दौरान साढ़े चार फुट रही होगी जब वह मौत का शिकार हुआ था।
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इसे पुरातत्व विभाग ने स्पीति के किब्बर से निकाला था। पुरातत्व विभाग की टीम के मुताबिक तब भी लोग 14 हजार 500 फीट की ऊंचाई पर बसे किब्बर गांव में रहते थे। विभाग की टीम ने जून 2015 में यह कंकाल निकाला था।

बर्फीले रेगिस्तान में मिला बच्चे का कंकाल, खुले चौंकाने वाले राज

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बच्चे का यह कंकाल स्पीति की तीन हजार साल पहले की सभ्यता को समझने में सहायक हो रहा है। पता चल पाया है कि शीत मरुस्थल लाहौल-स्पीति में तीन हजार साल पहले भी जीवन था। लोग तब भी स्पीति में दुर्गम परिस्थितियों में रहकर अपना जीवन यापन करते थे।
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भाषा संस्कृति पंजीकरण अधिकारी डाक्टर हरि चौहान ने बताया कि पुरातात्विक अध्ययन और फील्ड सर्वे के बाद उन्होंने इस कंकाल को ढूंढा। पहली बार इतनी ऊंचाई पर यह तत्व मिले हैं। किब्बर से ही मध्यकालीन पाषाण चीजें भी 14200 फुट की ऊंचाई पर मिली हैं।
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इसमें स्टोन टूल और शैल चित्र शामिल हैं। यह 3500 वर्ष पूर्व के हैं। शैल चित्रों में जंगली आकृतियां, याक, ब्लूशिप, सूर्य की आकृतियां, स्वास्तिक एवं गुफाओं में अंकित युद्ध के छायाचित्र शामिल हैं। युद्ध के छायाचित्रों से जाहिर है कि उस दौरान भी मनुष्यों में हकों को पाने के लिए छोटे-छोटे युद्ध हुआ करते थे।
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इस दौरान पुरातत्व विभाग की टीम में डाक्टर हरी चौहान, डाक्टर सकलानी, सुरेंद्र, नरेंद्र, निशा और हेमलता मौजूद रहीं। टीम के सदस्यों ने बताया कि पांच साल की कड़ी मेहनत के बाद यह प्राचीन वस्तुएं लोगों के लिए प्रदर्शनी में रखी है। प्रदर्शनी में मसक डियर के दांत, पोटरी, शैल बीड्स, स्टोन टूल जैसी चीजें भी आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। प्रदर्शनी में आईपीएच मंत्री विद्या स्टोक्स ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत की।
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