ये वही स्कूल है जिसके दरवाजे 22 अक्टूबर1947 में भारत पाक विभाजन के समय बंद कर दिए गए थे। उस समय पाकिस्तान के 42 छात्र यहां पढ़ते थे। मगर विभाजन के कारण इन्हें न चाहते हुए भी स्कूल छोड़ना पड़ा।
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ऐसे खुले भारत पाक बंटवारे में बंद इस स्कूल के दरवाजे
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अंतिम दिन इरविन हॉल में एक स्पीच हुई जिसमें छात्रों को इसकी जानकारी दी गई। सभी एक दूसरे से मिले। ये जानते थे कि शायद अब कभी एक दूसरे से न मिल पाएंगे। इसके बाद सभी हमेशा के लिए स्कूल छोड़कर चले गए।
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कहा जाता है कि स्कूल के इरविन हॉल को उसी दिन बंद कर दिया गया था जिस दिन ये छात्र स्कूल छोड़कर चले गए थे। उसके बाद सालों तक ये दरवाजे हमेशा बंद रहे। स्कूल ने परंपरा निभाई।
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यह स्कूल है शिमला का बिशप कॉटन स्कूल। 28 जुलाई 1859 को बना ये स्कूल एशिया का सबसे पुराना स्कूल है। इसका इतिहास भी बेहद गौरवपूर्ण है। अंग्रेजी शासनकाल में बनाया गया ये स्कूल कई ऐतिहासिक घटनाओं को संजोए हुए हैं।
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करीब 62 साल तक इस हॉल को किसी ने नहीं खोला। वहीं, स्कूल छोड़कर गए वो सभी छात्र भी कई नामी हस्तियां बन चुके थे। इनमें कई पाकिस्तान के प्रशासनिक अधिकारी बने तो हुमायू खान भारत में पाकिस्तान के दुतावास में तैनात हुए।
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मगर 62 साल बाद वह ऐतिहासिक लम्हा आया जब 2009 में स्कूल के दरवाजे फिर खोलने का फैसला लिया गया। स्कूल प्रशासन ने उन सभी छात्रों को न्यौता दिया जिन्हें 62 साल पहले स्कूल छोड़कर जाना पड़ा था।
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जो जिंदा थे उनमें से ज्यादातर लौटने को तैयार हुए और टॉय ट्रेन में सवार होकर शिमला पहुंचे। हूमायूं खान समेत इन्हीं छात्रों ने स्कूल के इस हॉल के दरवाजे खोले। हॉल में बैठकर अपनी यादें ताजा की। ये लम्हा काफी भावुक कर देने वाला था।
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जिंदगी के अंतिम पड़ाव पर पहुंच चुके सभी छात्र एक दूसरे से पुरानी यादें ताजा करते दिखाई दिए। इंग्लैंड से भी कुछ लोग यहां पहुंचे जो उन दिनों इस स्कूल के छात्र हुआ करते थे। कहा जाता है कि 1905 को ये स्कूल पूरी तरह से जल गया था। मगर 1907 में इसकी मरम्मत कर दोबारा खड़ा किया गया। आज यह स्कूल देश के टॉप चुनिंदा स्कूलों में शामिल है।
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स्कूल में आज भी दशकों पहले पढ़ाई पूरी करने वाले सभी छात्रों के नाम दर्ज हैं। इसके अलावा 1914 के विश्वयुद्घ में शहीद होने वाले जवानों की यादें भी यहां सुरक्षित हैं।
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बीसीएस 2014 में भारत का नंबर वन ब्वॉयज बोर्डिंग स्कूल भी बन चुका है। यह देश का पहला स्कूल है जिसने एडवेंचर्स स्पोर्ट्स के तौर पर सबसे पहले स्कूबा डाइविंग शुरू करवाई है।