कुल्लू में बंसत पंचमी मनाई।
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यहां भी कुल्लू और हरिपुर की तरह ही देव परंपरा का निर्वहन किया गया। बता दें कि ढालपुर, मणिकर्ण, वशिष्ठ, हरिपुर और नग्गर से भगवान रघुनाथ का इतिहास जुड़ा हुआ है। उधर, देवता ठाकुर माधवराय के कारदार देवी दयाल शर्मा ने कहा कि साल 1651 में भगवान रघुनाथ को अयोध्या से देवभूमि कुल्लू लाया गया था। कुल्लू के रघुनाथपुर, वशिष्ठ और मणिकर्ण में भगवान राम के मंदिर हैं। जबकि हरिपुर और नग्गर में श्रीकृष्ण के मंदिर हैं।