गरीब परिवार की बेटी भी अगर कुछ ठान ले तो उसे हासिल करने से कोई चीज उसे नहीं रोक सकती। एक बार फिर ऐसा ही कुछ कर दिखाया है हिमाचल के ऊना की बख्शो ने। वह गोल्ड मेडल जीतकर एक बार फिर ट्रैक पर लौट आई है।
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कई महीने तक पेट दर्द के कारण रेस से दूर रही यह बेटी इस बार पूरी तैयारी के साथ मैदान में उतरी थी। रेस में वह ऐसे दौड़ी कि कोई भी खिलाड़ी उसके आसपास नहीं फटक पाई। आखिरकार बख्शो ने फिर से गोल्ड मेडल अपने नाम कर लिया।
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अंडर 19 स्कूली खेल कूद प्रतियोगिता में तीन हजार मीटर की दौड़ में पहला स्थान प्राप्त कर बख्शो ने गोल्ड मेडल अपने नाम कर लिया है। पेट दर्द से जूझने वाली बख्शो अब फिर से फिट दिखाई दे रही है। वह अब राज्य स्तरीय प्रतियोगिता के लिए कमर कस चुकी है।
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बख्शो की सफलता का यह सफर काफी संघर्षपूर्ण रहा है। झोंपड़ी में रहने वाली इस बेटी के पास कभी ट्रैक पर दौड़ने के लिए जूते तक नहीं थे। जीरो डिग्री तापमान के बीच फिर भी उसने 5 हजार मीटर रेस में पहला स्थान हासिल किया था।
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मगर जब लोगों को पता चला कि गोल्ड मेडल जीतने वाली यह बेटी किसी अमीर घर से नहीं बल्कि घासफूस की झोंपड़ी में पली बढ़ी है तो सभी दंग रह गए।
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बाद में बख्शो जब फिर ट्रैक पर उतरी तो पेटदर्द के कारण उसका सपना टूट गया। ईलाज के कारण वह कई महीनों तक प्रैक्टिस से दूर रही। लेकिन अब वह ज्यादा फुर्ती के साथ ट्रैक पर दौड़ रही है।
अब जब बख्शो को आर्थिक मदद के साथ साथ कोचिंग भी मिलने लगी है तो वह बड़ी प्रतियोगिताओं के लिए तैयार हो चुकी है। बख्शो चाहती है कि वह देश का नाम एथलेटिक्स में रोशन करे।