कहते हैं बुलंद हौसलों के आगे बड़े-बड़े पहाड़ झुक जाते हैं। बस आगे बढ़ने की हिम्मत के साथ चुनौतियों से लड़ने का जज्बा होना चाहिए। ऐसे ही हौसले की मिसाल है हिमाचल के ऊना के ईसपुर गांव की छात्रा बख्शो देवी। आइए जानते हैं कौन है बख्शो देवी।
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बहादुर बेटी का कारनामा देख चौंके सभी, आप भी करेंगे सलाम
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हाल ही में ऊना में हुई दौड़ प्रतियोगिता में 9वीं की इस छात्रा ने
नंगे पांव दौड़कर पांच हजार मीटर की स्पर्धा में जिले भर की धाविकाओं को
पछाड़ दिया। स्कूल की वर्दी में नंगे पांव दौड़ती हुई उस छात्रा के जज्बे
को दर्द भी नहीं रोक पाया। इंदिरा मैदान में दौड़ते हुए अचानक बख्शो के पेट
में तेज दर्द उठा, लेकिन जीत के जुनून ने कदमों को ऐसी रफ्तार दी कि
दूसरीं एथलीट इसके आसपास भी नहीं पहुंच सकीं।
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उसके विरोधी जूतों और
किट के साथ ट्रैक पर थीं। बख्शो के पैरों में न जूते थे और न ही पहनने के
लिए निकर और टी-शर्ट। बस स्कूल की वर्दी के साथ मैदान में नंगे पांव बख्शो
उतर गई और जीतकर ही दम भरा। आखिरकार गरीब परिवार की बेटी की मेहनत रंग लाई
और खिताब की हकदार बनी।
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इस होनहार में आगे बढ़ने का हौसला तो है
लेकिन घर में कोई ऐसा नहीं है जो इसके हौसले को और बढ़ाने में इसकी मदद कर
सके। इससे बड़ी विडंबना और क्या होगी कि इस होनहार के पास ट्रैक पर दमखम
दिखाने के लिए जूते तक नहीं हैं। बख्शो देवी अपने घर में छह बहनों में सबसे
छोटी है। उसके सिर पर पिता का साया भी नहीं है। मां मेहनत मजदूरी कर
परिवार को पाल रही है।
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प्रतियोगिता में पहले स्थान पर रहने वाली बख्शो को इनाम के तौर पर छह हजार मिले तो उसने कहा कि यह पैसे वह अपनी मां को देगी, क्योंकि मां को घर का खर्च चलाना होता है। बख्शो का कहना है कि दौड़ना उसका शौक है और वह अंतरराष्ट्रीय धाविका पीटी ऊषा की तरह नाम कमाना चाहती है।
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