प्रदेश के ऊंचाई वाले क्षेत्रों किन्नौर, लाहौल स्पीति, चंबा और कुल्लू में बीते कई सालों से हिमखंड गिर रहे हैं।
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मार्च 1979 में लाहौल स्पीति में हिमखंड गिरने से 237 लोगों की जान गई थी। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के मुताबिक जनवरी 1975 में भूकंप के बाद हिमखंड गिरने से सड़कों को भारी नुकसान हुआ था।
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मार्च 1978 में लाहौल स्पीति में हिमखंड गिरने से 30 लोगों की जान गई थी। इसके अलावा किन्नौर में हिमखंड गिरने से करीब चार महीनों तक सड़क मार्ग बंद रहे थे। सितंबर 1995 में भी हिमखंड गिरने से बाढ़ आई थी।
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इससे भी सड़कों को भारी नुकसान हुआ था।राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण शिमला के अनुसार इस साल जनवरी और महीने के दौरान प्रदेश में हिमखंड गिरने की 33 घटनाएं हो चुकी हैं।
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जान का नुकसान बीते दिनों किन्नौर में गिरे हिमखंड की घटना में ही हुआ है। शेष मामलों में सड़कों, घरों, पेयजल योजनाओं और बिजली ट्रांसफार्मरों को नुकसान हुआ है।
स्नो एंड एवालांच स्टडी एसटेबलिशमेंट मनाली ने 20 फरवरी को किन्नौर के कुछ क्षेत्रों में हिमखंड गिरने की चेतावनी जारी की थी। भारत सरकार के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन के तहत काम करने वाले इस संस्थान द्वारा सेना के साथ-साथ गृह मंत्रालय और प्रदेश सरकार को भी सूचित किया जाता है।