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राज्यपाल के सामने जातपात, साथ नहीं किया भोजन

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करीब दो सौ साल पुराना कोटला गांव (कुल्लू, हिमाचल प्रदेश) भले ही जलकर राख का ढेर बन गया हो, लेकिन लोगों में जातपात की दीवार यह अग्निकांड भी नहीं तोड़ पाया। आज भी लोग यहां जातपात के फेर में फंसे हुए हैं। अग्निकांड के बाद जब प्रभावितों के लिए लंगर लगाया गया तो अपर और लोअर जाति वालों के लिए अलग-अलग मैस लगानी पड़ी। रिपोर्ट: रितेश गुलेरिया, फोटो: अजय कुमार
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राज्यपाल के सामने जातपात, साथ नहीं किया भोजन

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वीरवार को राज्यपाल आचार्य देवव्रत कोटला गांव पहुंचे। इस दौरान जातपात के भेद को मिटाने के लिए उन्होंने करीब एक घंटा लंबा भाषण दिया। शास्त्रों से जुड़े कई तर्क भी दिए। उन्होंने मनुष्य को एक पिता की संतान बताया। कई उदाहरण दिए।
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राज्यपाल के सामने जातपात, साथ नहीं किया भोजन

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उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि आज सभी लोग एक साथ भोजन करेंगे, जिसकी व्यवस्था जिला प्रशासन की ओर से की गई थी। राज्यपाल ने कहा कि वह निचले तबके के लोगों के साथ भोजन करेंगे।

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उन्होंने कोटला गांव के अपर कास्ट के लोगों से भी साथ भोजन करने की अपील की। लेकिन, जैसे ही कार्यक्रम खत्म हुआ और भोजन की व्यवस्था शुरू हुई तो अपर कास्ट वाले लोग वहां से एक-एक कर खिसकते गए।
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हालांकि, राज्यपाल ने निचले तबके की महिलाओं के साथ भोजन किया।
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नाम न छापने की शर्त पर देव समाज से जुड़े लोगों ने बताया कि देवता ऐसा करने की इजाजत नहीं देता है। 
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उपायुक्त कुल्लू राकेश कंवर ने कहा कि राज्यपाल ने सबको साथ मिलाने का एक बेहतर कदम उठाया था। उन्होंने स्वयं निचले तबके की महिलाओं के साथ बैठ कर भोजन किया। लोगों को समझाया भी लेकिन हो सकता है लोगों की सोच बदलने में थोड़ा समय लगे।
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