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टीन के नीचे खुले में रहने को मजबूर है पांच सदस्यों का परिवार, नहीं पहुंच पाई सरकार की योजना

Sat, 31 Aug 2019 07:52 PM IST
Krishan Singh शशिभूषण पुरोहित, अमर उजाला, ऊना
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- फोटो : अमर उजाला
..यहां रहते हुए 20 साल हो गए हैं जी। न किसी प्रधान ने मेरा दर्द सुना न किसी डीसी ने सुनवाई की। मैं मंत्री तक जाकर आई लेकिन... और इतना कहते हुए वीना देवी रो पड़ीं, उसका गला भर आया। लेकिन बुजुर्ग महिला रुकी नहीं। बोलीं-बाढ़ में मेरा सामान बह गया। नेता लोग वोट मांगने आए तो पैर छू कर बोले थे कि तुम्हारे लिए मकान बनवा कर देंगे, लेकिन चुनाव खत्म होने के बाद कोई नहीं आया। लोगों के घरों में बर्तन मांजती हूं, अब आप ही बताइए अपने पूरे परिवार को लेकर कहां जाऊं।
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- फोटो : अमर उजाला
गरीबों की मदद का दम भरने वाली सरकारों के दावों की पोल ऊना जिला के कोटला खुर्द गांव में खुलती नजर आती है। यहां दो दशक से वीना देवी पांच सदस्यों के परिवार के साथ टीन के नीचे जिंदगी गुजर-बसर कर रही है। कहने को तो केंद्र और प्रदेश सरकार ने गरीबों को घर निर्माण के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं लेकिन ग्रामीण विकास मंत्री वीरेंद्र कंवर के ही गृह विधानसभा क्षेत्र में रहने वाली वीना देवी की ओर किसी ने नजर-ए-इनायत नहीं की। 
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वीना की डेढ़ साल की बेटी - फोटो : अमर उजाला
परिवार की हालत इतनी खराब है कि वीना अपनी डेढ़ साल की बेटी को बेड पर बांध कर काम पर निकली हैं। वीना ने कई जगह अपनी गरीबी की दुहाई देते हुए एक अदद छत मुहैया करवाने की गुहार लगाई, लेकिन न पंचायत, न प्रशासन और न ही राजनेता उसे छत दिला पाए। गौरतलब है कि वीना देवी का बाकायदा बीपीएल कार्ड बना है। इसके तहत वह आवास योजना के लिए पात्र है, लेकिन वीना ने बताया कि वह जब भी पंचायत गई, उसे वहां से डांट पटकार कर भगा दिया गया। 

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- फोटो : अमर उजाला
बीडीओ ऊना यशपाल सिंह वीना देवी ने मामले को प्राथमिकता के आधार पर हल करने का दावा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वे इस मामले की जांच करेंगे। करीब 20 साल पहले वीना के पति ने एक कमरा बनाया था। इसके ऊपर भी आज दिन तक लोहे की ही टीन पड़ी है। करीब दस साल पहले पति का निधन हो गया। उसके बाद ही परिवार की सारी जिम्मेदारी वीना देवी के कंधों पर आ गई। वीना देवी ने लोगों के घरों में काम कर दोनों बेटों का पालन पोषण किया। एक बेटे की शादी भी कर दी।
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- फोटो : अमर उजाला
वीना देवी का परिवार बीपीएल में शामिल है। दोनों बेटे मेहनत-मजदूरी करके ही बमुश्किल दो वक्त की रोटी का जुगाड़ कर रहे हैं। परिवार में कुल पांच सदस्य हैं और सभी एक कमरे में गुजर-बसर कर रहे हैं। उसी कमरे में रसोई और उसी में रहना परिवार के लिए बहुत मुश्किल है। वीना के घर के साथ ही खड्ड है। बरसात में खड्ड का सारा पानी इनके टूटे-फूटे कमरे में घुस जाता है। यहां तक कि कई दफा घर का सामान भी पानी में बह चुका है। 12 साल पहले पति की मौत हो गई और तीन महीने पहले ही पैंशन लगी है। 
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