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खौफनाक! आंखों के सामने जले 80 आशियाने, बेबस थे लोग

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हिमाचल के कुल्लू जिले की सैंज घाटी के कोटला में रविवार दोपहर बाद पांच बजे अचानक लगी आग में पूरा गांव ही जलकर राख हो गया है। आग इतनी भयंकर थी कि रात नौ बजे तक 80 घर और तीन मंदिर पूरी तरह से जल चुके थे। चार मासूम लापता बताए जा रहे हैं। लकड़ी से बने घरों में गैस सिलेंडर फटने से धमाकों के साथ आग पूरे गांव में फैल गई। गांव के लिए सड़क नहीं होने के चलते अग्निशमन विभाग की गाडि़यां मौके पर नहीं पहुंच सकीं। रिपोर्ट: रितेश गुलेरिया, फोटो: अजय कुमार
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खौफनाक! आंखों के सामने जले 80 आशियाने, बेबस थे लोग

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कुछ घंटों तक तो ग्रामीणों ने नलों से पानी ढोकर और मिट्टी डालकर आग बुझाने का प्रयास किया, लेकिन आग के भयंकर रूप धारण करते ही स्थिति ‘तमाशा’ देखने वाली हो गई। हालांकि, समय रहते ग्रामीण तो घरों से बाहर निकल आए, लेकिन कई मवेशी और करोड़ों की संपत्ति चंद घंटों में ही राख के ढेर में तबदील हो गई। खबर लिखे जाने तक आग पर काबू नहीं पाया जा सका था। ग्रामीण किसी न किसी तरह आसपास के घरों को आग से बचाने की जद्दोजहद में देर रात तक लगे हैं।
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खौफनाक! आंखों के सामने जले 80 आशियाने, बेबस थे लोग

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बताया जा रहा है कि कोटला गांव और आसपास करीब 100 घर थे। जिनमें करीब 80 घर पूरी तरह से जल गए। 20 और घरों पर खतरा बना हुआ है। आग लगने के कारणों का अभी खुलासा नहीं हुआ है, हालांकि मौके पर पहुंचे प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि घासनी में सबसे पहले आग लगी थी। तेज हवा होने के कारण आग पूरे गांव में फैल गई। एसडीएम बंजार अश्वनी कुमार ने बताया कि मैं मौके पर तो पहुंच गया हूं, लेकिन आग इतनी भयंकर है कि इस पर काबू पाना मुश्किल है।

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सैंज घाटी के बड़ा देव छमांहू, छामणी धमाणी छमाहूं और बुहणी देवता के मंदिर भी जलकर राख हो गए हैं। मंदिरों में रखी मूर्तियां और उनका खजाना भी जलने की सूचना है। जिस समय गांव में आग लगी उस दौरान गांव के लोग देवता का आशीर्वाद लेने एक घर में एकत्रित हुए थे। यहां देवली हो रही थी। हालांकि अधिकतर पुरुष काम पर और महिलाएं खेतों में थी। कई लोग जब तक घर पहुंचे तो उनका आशियाना खाक हो चुका था। न वे सामान बचा पाए और न ही मवेशी।
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सैंज घाटी का कोटला गांव अभी भी सड़क से नहीं जुड़ पाया है। दूसरे गांवों के लिए आधी-अधूरी सड़क बनी है वह भी टूटी हुई है। अग्निशमन विभाग को तत्काल सूचना तो दे दी, लेकिन दमकल गाडि़यां गांव तक नहीं पहुंच पाई। दमकल कर्मी पैदल गांव तक पहुंचे, लेकिन खाली हाथ भयंकर आग को नहीं बुझा सके।
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समय शाम का करीब सवा पांच बजे स्थान बालीचौकी से करीब 8 किमी दूर कोटला गांव में अचानक आग लगी। हादसे के समय गांव में कुछ लोगों को छोड़ कोई नहीं था। सूचना मिलते ही लोगों का पहुंचना करीब पौने छह बजे शुरू हुआ। कई घरों के मालिक जो आठ बजे तक भी नहीं पहुंच पाए थे।
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आग लगने का कारण किसी को समझ नहीं आया। हालांकि शुरू के करीब डेढ़ घंटे तक लोगों ने आग पर काबू पाने का प्रयास किया। लेकिन हवा के तेज रुख से कभी आग इधर तो कभी उधर लोगों के आशियानों को जला रही थी। देखते ही देखते समय बीतता गया। करीब 6.20 बजे लोगों के घरों में रखे सिलेंडर भी फटने शुरू हो गए।

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धमाकों से आग और भड़क उठी है। जो लोग शुरू में आग पर काबू पाने का प्रयास कर रहे थे। वह भी अब केवल आंखों में आंसू लिए अपने आशियानों को जलता देख रहे थे। शाम आठ बजे तक करीब 80 परिवार बेघर हो चुके थे। हर ओर बचाओं बचाओं की चिख पुकार थी। लेकिन कोई चाह कर भी कुछ नहीं कर पाया था।

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सड़क न होने के कारण फायर की गाडिय़ां भी गांव तक नहीं पहुंच पाई। फायर विभाग के जवान करीब 7.15 बजे मौके पर पहुंचे। जबकि प्रशानिक अधिकारियों का लोगों को अभी इंतजार था। अंधेरा हो चुका है। आग पर काबू पाना मुश्किल है। गांव के प्रेम लाल,राम चंद्र, सोहन सिंह, मोहन सिंह, गिरधारी लाल सहित अन्य का कहना है कि जैसे गांव लगी है उस पर काबू पाना मुश्किल है। वो लोग चाह कर भी कुछ नहीं कर पा रहे है।
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तस्वीर में कोटला गांव जो जलकर राख हो गया। हाल में हिमाचल के बड़े अग्निकांड- 6 जनवरी, 2008 को देश का सबसे पुराना लोकतंत्र माने जाने वाले मलाणा गांव में 150 घर, छह मंदिर और जमलू देवता के भंडार जलकर राख। 24 दिसंबर 2011: शिमला के रोहडू़ क्षेत्र की चिचवाड़ी गांव में लगभग 80 घर जलकर राख हुए। लगभग 200 मवेशी भी जले। 27 जनवरी 2014: शिमला की ऐतिहासिक गोर्टन कैसल बिल्डिंग जलकर राख। 30 जनवरी 2014: शिमला जिले के कोटखाई के बड़ेवं गांव में आग लगी। लकड़ी के सात मकान जलकर राख हुए। 1 नवंबर 2014: बीआरओ का दीपक प्रोजेक्ट भवन जलकर राख।
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