जी हां हिमालयी की गोद में देवभूमि हिमाचल में बसे मलाणा गावं के आराध्य इष्ट देव जमदग्नि ऋषि जी (जमलू देवता) महाराज भगवान श्री विष्णु जी के छठवें अवतार भगवान परशुराम के पिता हैं। यह मंदिर गांव के प्रारंभ में ही आता है। मगर आस्था के अनुसार इस मंदिर और इसके आसपास किसी भी वस्तु को छूने मना है।
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ऐसा मंदिर जिसे छूना मना है, गलती की तो लगेगा 'जुर्माना'
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ऐसा करने वाले सैलानी व बाहरी शख्स को जुर्माने में एक हजार रूपए चुकाने पड़ते हैं। इसको लेकर सख्त हिदायतों वाले बोर्ड पूरे गांव में जगह जगह पर लगे हुए हैं।
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ऐसा मंदिर जिसे छूना मना है, गलती की तो लगेगा 'जुर्माना'
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देवभूमि हिमाचल में बसे मलाणा गावं के आराध्य इष्ट देव जमदग्नि ऋषि जी (जमलू देवता) महाराज भगवान श्री विष्णु जी के छठवें अवतार भगवान परशुराम के पिता हैं। इनका मंदिर गांव के प्रारंभ में ही आता है। मगर यहां लगे बोर्ड पर साफ शब्दों में लिखा है कि यहां पर किसी चीज को छूना मना है।
ऐसा मंदिर जिसे छूना मना है, गलती की तो लगेगा 'जुर्माना'
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पार्वती वैली की गोद में बसे मालणा गांव में यह मान्यता देव स्थान की शुद्धता को बनाए रखने के लिए हैं। यहां जमलू देवता के पुजारी केवल एक ही परिवार से होतें हैं। यह परिवार ही है जिसे यहां पर सफ़ेद रंग की पगड़ी इस गावं में पहनने का हक प्राप्त है।
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जैसा की हम जानते हैं की इस गावं का कोई भी मुकद्दमा गावं की पंचायत से बाहर कभी नहीं जाता और शासन प्रणाली 2 हिस्सों मैं बंटी हुई है निचला तथा ऊपरी सदन। निचले सदन को कनिष्ठा तथा ऊपरी सदन को जयेष्ठा कहा जाता है।
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ऊपरी सदन मैं जमलू देवता के गुर तथा पुजारी के अतिरिक्त और भी सदस्य होते हैं किन्तु इन दोनों का होना अति आवश्यक होती है। यह देवता के दिशानिर्देश को प्रकट करतें हैं। जमलू देवता का पुराना मंदिर कुछ वर्ष पहले हुए अग्निकांड में जल गया था। इस मंदिर का निर्माण दोबारा करवाया गया है।
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इस सदन को हकीमा कहा जाता है और देवता के पुजारी को हाकिम। यह शब्द हाकिम कुछ 'आका' जैसा लगता है।
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यदि आप वहां पर कभी घूमने जातें हैं तो वहां पर मंदिर परिसर के इर्द-गिर्द किसी वस्तु या घास को ना छुए क्योंकि ऐसा करने की वहां मनाही है। इसके दंड के रूप मैं मलाणावासियों को देवता को बलि समर्पित करनी पड़ती है।
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यही वजह है कि मलाणावासियों ने मंदिरों और इसके आसपास के स्थानों पर बोर्ड के माध्यम से सैलानियों को किसी भी वस्तु को न छूने की हिदायत दी है। ऐसा न करने पर उक्त शख्स को एक हजार रूपए जुर्माना देना पड़ता है।
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प्रकृति की गोद में बसें इस ऐतिहासिक गांव को जाने वाले रास्ते पर खूबसूरत वादियों के नजारे देखने को मिलते हैं। कुल्लू पहुंचने पर बस व छोटी गाड़ी से मणिकर्ण और यहां से जरी पहुंचकर आप पैदल यात्रा करके मलाणा गांव पहुंच सकते हैं।
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यहां की परंपराए और लोक नृत्य को देखना भी अपने आप में दिल को सकून पहुंचाने वाला है। यहां के लोगों ने सदियों से अपनी संस्कृति को संजोए रखा है। मगर यहां पहुंचेन पर दी गई हिदायतों को जरूर ध्यान में रखें।