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World NGO Day 2022: भारत की पांच महिलाएं, जिन्होंने मानव सेवा में लगा दिया अपना जीवन

Sun, 27 Feb 2022 12:40 PM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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विश्व एनजीओ दिवस - फोटो : pixabay
आज विश्व एनजीओ दिवस मनाया जाता है। हर साल 27 फरवरी को दुनिया भर में एनजीओ दिवस मनाया जाता है। इस दिन को दुनिया के 89 से अधिक देश और 6 महाद्वीप मनाते हैं। पहली बार विश्व एनजीओ दिवस मनाने की शुरुआत 2014 से हुई थी। एनजीओ का अर्थ है गैर सरकारी संगठन। एनजीओ एक ऐसी संस्था होती है, जो सरकार या किसी व्यवसायी व लाभ के लिए काम नहीं करती, बल्कि जनसेवा ही उसका उद्देश्य होता है। जरूरतमंदों की मदद करना, गरीब-बेसहाराओं के दुख-दर्द को समझकर उनको सहारा बनना या मदद तलाश करना एनजीओ का काम होता है। एनजीओ को गैर लाभ संगठन भी कहा जा सकता है। इस दिन को मनाने का मुख्य उद्देश्य एनजीओ के प्रति जागरूकता बढ़ाना और एनजीओ के कार्यों को प्रोत्साहित करना है। भारत में कई ऐसे नेक व्यक्तित्व के लोग हैं, जो अपने आप में ही एनजीओ हैं। खास कर भारत में गरीबों, बेसहारा लोगों की मदद करने में कई महिलाओं का विशेष योगदान है। विश्व एनजीओ दिवस के मौके पर जानते हैं भारत में मानव सेवा को ही अपना जीवन बना लेने वाली टॉप 5 महिला समाज सेविका के बारे में।
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विश्व एनजीओ दिवस - फोटो : Facebook/The New Vision
मदर टेरेसा

मदर टेरेसा का नाम कौन नहीं जानता।  कम उम्र में ही मानव सेवा को अपना लक्ष्य बना कर वह अल्बानिया से आयरलैंड आ गई थीं। बाद में 1929 में मटर टेरेसा भारत आ गईं और बेसहारा लोगों की मदद में अपना जीवन गुजार दिया। 1948 में उन्हें भारत की नागरिकता मिल गई। उन्हें 1979 में उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार मिला था। वहीं 1980 में मदर टेरेसा को भारत रत्न भी दिया गया।
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विश्व एनजीओ दिवस - फोटो : instagram/vinaysindhutai
सिंधुताई सपकाळ

महाराष्ट्र में हजारों अनाथ बच्चों को मां का प्यार देने वाली सिंधुताई सपकाल भी अपने आप में एक गैर सरकारी संगठन बन गईं। उन्होंने बिना मां बाप के बच्चों को आसरा दिया। वह खुद गरीब और बेसहारा थीं लेकिन रेलवे स्टेशन, फुटपाथ पर बैठे गरीब बच्चों का पेट भरने के लिए सड़कों पर भीख मांगा करती थीं। एक दो नहीं बल्कि 1400 बच्चों की मां बनी सिंधुताई सपकाल को महाराष्ट्र की मदर टेरेसा कहा जाता है। उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी अनाथ बच्चों की सेवा में गुजार दी। सिंधु ताई को 700 से ज्यादा सम्मान मिल चुके हैं। सम्मान से प्राप्त रकम को सिंधु ताई ने अपने बच्चों के पालन पोषण में खर्च कर देती थीं।

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विश्व एनजीओ दिवस - फोटो : twitter
अरुणा राय

भारत की राजनीतिक और सामाजिक कार्यकर्ता अरुणा राय ने भारतीय प्रशासनिक सेवा में कार्य किया। उन्होंने राजस्थान के गरीब लोगों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए विशेष तौर पर कई प्रयास किए। सूचना का अधिकार लागू करने के लिए अरुणा राय ने 6 अप्रैल 1995 को अजमेर के ब्यावर में आंदोलन की शुरुआत की थी। रोजगार गारंटी और सूचना का अधिकार कानून बनाने में अरुणा राय की अहम भूमिका है। वह मजदूर किसान शक्ति संगठन की संस्थापिका हैं, उन्होंने मजदूरों के जीवन में सुधार लाने का भरपूर प्रयास किया। उनके योगदान के लिए अरुणा राय को मैग्सेसे पुरस्कार और मेवाड़ सेवा श्री समेत कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया।
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विश्व एनजीओ दिवस - फोटो : twitter/PIBDehradun
बसंती देवी

पर्यावरण संरक्षण, देश की संस्कृति और लोगों के जीवन में सुधार के लिए अपना जीवन लगा देने वाली बसंती देवी को हाल ही में पद्म पुरस्कार 2022 से सम्मानित किया गया। पर्यावरण को बचाने के लिए उनका प्रयास अतुलनीय है। बसंती देवी ने पर्यावरण और कोसी नदी को बचाने से लेकर समाज की कई कुरीतियों को दूर करने के लिए महिला समूहों का आह्वान किया था। उत्तराखंड में महिला समूहों के माध्यम से उन्होंने जंगल को बचाने की मुहिम शुरु की। वहीं घरेलू हिंसा और महिलाओं पर होने वाले प्रताड़नाओं को रोकने के लिए भी जनजागरण किए। बसंती देवी के प्रयास से पंचायतों के सशक्तिकरण में महिलाओं की भूमिका बढ़ी। 
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विश्व एनजीओ दिवस - फोटो : facebook/SunitaNarain
सुनीता नारायण

पिछले दो दशकों से पर्यावरण संरक्षण को लेकर पर्यावरणविद सुनीता नारायण जागरूकता बढ़ा रही हैं। अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त सुनीता का इस दिशा में अभूतपूर्व योगदान है। सुनीता नारायण ने हरित ईंधन, पर्यावरण प्रदूषण, महानगरों में वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण, ध्वनि प्रदूषण जैसे प्रदूषण से जुड़े तमाम आयामों पर समाज को जागरूक करने में अहम भूमिका निभाई है। उनके इस योगदान और प्रयासों को ब्रिटेन की सिटी ऑफ इडनबर्ग काउंसिल ने मान्यता देते हुए सुनीता नारायण को ‘इडनबर्ग मेडल 2020' से सम्मानित किया गया है।
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